बिना पुलिस, बिना वारंट… फिर भी ‘गिरफ्तार’! ये नया ऑनलाइन फ्रॉड क्या है? चलिए जानते हैं

    आज का दौर पूरा डिजिटल हो चुका हैं और इस दौर में ठगी भी बहुत तेजी से बढ़ रहा हैं. अब चोरी सिर्फ जेब तक ही सीमीत नहीं रहेगी बल्कि फोन से भी होने लगा हैं. हाल ही के कुछ सालों में एक नया और खतरनाक साइबर स्कैम सामने आया हैं जिसे हम “Digital Arrest Scam” कहते हैं. इसका नाम सुनके ही लोगों के होश उड़ जा रहे हैं , तो समझ जाइए इससे ठगी कितनी बड़ी होती होगी और यही इस ठगी का सबसे बड़ा हथियार है.

    बिना पुलिस, बिना वारंट… फिर भी ‘गिरफ्तार’! ये नया ऑनलाइन फ्रॉड क्या है? चलिए जानते हैं

    टीएनपी डेस्क: आज का दौर पूरा डिजिटल हो चुका है और इस दौर में ठगी भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है. अब चोरी सिर्फ जेब तक ही सीमीत नहीं रहेगी बल्कि फोन से भी होने लगा हैं. हाल ही के कुछ सालों में एक नया और खतरनाक साइबर स्कैम सामने आया है जिसे हम “Digital Arrest Scam” कहते हैं. इसका नाम सुनके ही लोगों के होश उड़ जा रहे हैं , तो समझ जाइए इससे ठगी कितनी बड़ी होती होगी और यही इस ठगी का सबसे बड़ा हथियार है.

    इस स्कैम में अपराधी खुदको पुलिस ऑफिसर या cbi का बताकर लोगों को कॉल करता है. कॉल उठाते ही सामने वाला व्यक्ति भाड़ी आवाज में कहता है की आपके नाम पर कोई बड़ा केस दर्ज है जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, फेक सिम कार्ड, या बैंक फ्रॉड बस इतना सुनते ही सामने वाला आम आदमी डर जाता है, और सारी ठगी की खेल यही से शुरू होती है.

    इसके बाद स्कैमर कहता है कि आप “डिजिटल अरेस्ट” में है, यानी की आपको कही जाने की जरूरत नहीं है लेकिन आपको लगातार वीडियो कॉल पे रहना होगा और जो भी वो कह रहा होगा उसका बात आपको मानना होगा. वो आपको डराएगा भी की अगर आपका कॉल कटा तो आपको तुरंत अरेस्ट कर लिया जाएगा.

    बहुत सारे मामलों में ये लोग नकली वर्दी, आईडी और ऑफिस का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं ताकि किसको उनलोगों पे शक ना हो. इससे सामने वाला व्यक्ति पूरी तरह विश्वास में आ जाता है.

    फिर शुरू होता है पैसे का खेल. स्कैमर फिर कहता हैं की केस को “सुलझाने” के लिए आपको तुरंत एक फिक्स अमाउन्ट पैसे का देना होगा या फिर ट्रांसफर करना होगा.

    स्कैमर कहते हैं कि केस को “सुलझाने” के लिए आपको तुरंत एक निश्चित रकम ट्रांसफर करनी होगीवे इसे “वेरिफिकेशन”, “सिक्योरिटी डिपॉजिट” या “फाइन” का नाम देते हैं. डर और घबराहट में लोग बिना सोचे-समझे पैसे भेज भी देते हैं.

    इस स्कैम की सबसे भयावह बात यह है कि इसमें डर और मनोविज्ञान (psychology) का इस्तेमाल किया जाता है. ज्यादातर लोग कानून से डरते हैं. जिसका फाइदा लोग उठाकर अपने कंट्रोल मे कर लेते हैं.  

    कई बार स्कैमर घंटों तक वीडियो कॉल पर ही रहते हैं, ताकि व्यक्ति किसी से सलाह न ले सके. उसे इतना दबाव में रखा जाता है कि वह सही-गलत का फर्क नहीं कर पाता हैं.  

    अब सबसे बड़ा सवाल ये की इस स्कैम से कैसे बच सकते हैं?

    सबसे पहली बात,कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार नहीं कर सकती.  अगर कोई ऐसा कह रहा है, तो वह 100% ठगी है.

    दूसरी बात ये हैं की कभी भी किसी अनजान कॉल पर अपनी personal या bank details शेयर कभी न करें.

    तीसरी बात, अगर कोई आपको डराकर पैसे मांग रहा है, तो तुरंत कॉल काटें और इसकी शिकायत करें.

    याद रखें, असली पुलिस या सरकारी एजेंसी कभी भी इस तरह से पैसे नहीं मांगती.

    सरकार और साइबर क्राइम विभाग लगातार लोगों को इस तरह के scams के प्रति जागरूक कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कई लोग इसका शिकार हो रहे हैं, क्योंकि स्कैमर नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं.

     


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