स्कूल में अब दो साल से पहले नहीं होगी फीस बढ़ोतरी, Logo बदलकर यूनीफॉर्म और बेल्ट बेचने पर भी रोक जानिए और क्या है आदेश

    बढ़ती महंगाई के बीच निजी स्कूलों की मनमानी फीस से परेशान अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. अब रांची में प्राइवेट स्कूल अपनी फीस मनमाने तरीके से नहीं बढ़ा सकेंगे. जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति ने बड़ा फैसला लेते हुए फीस बढ़ोतरी की सीमा तय कर दी है. नए नियम के अनुसार, कोई भी स्कूल अधिकतम 10% तक ही फीस बढ़ा सकेगा और यह बढ़ोतरी भी एक तय अवधि के लिए लागू होगी.

    स्कूल में अब दो साल से पहले नहीं होगी फीस बढ़ोतरी, Logo बदलकर यूनीफॉर्म और बेल्ट बेचने पर भी रोक जानिए और क्या है आदेश

    रांची (RANCHI): बढ़ती महंगाई के बीच निजी स्कूलों की मनमानी फीस से परेशान अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. अब रांची में प्राइवेट स्कूल अपनी फीस मनमाने तरीके से नहीं बढ़ा सकेंगे. जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति ने बड़ा फैसला लेते हुए फीस बढ़ोतरी की सीमा तय कर दी है. नए नियम के अनुसार, कोई भी स्कूल अधिकतम 10% तक ही फीस बढ़ा सकेगा और यह बढ़ोतरी भी एक तय अवधि के लिए लागू होगी.

    इस फैसले का मकसद साफ है, अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना और शिक्षा को सुलभ बनाए रखना. लंबे समय से अभिभावक स्कूलों द्वारा हर साल बढ़ाई जा रही फीस, महंगी किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर शिकायत कर रहे थे. अब प्रशासन ने इन सभी मुद्दों पर सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं.

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्कूलों को पारदर्शिता के साथ काम करना होगा और बिना ठोस कारण के फीस नहीं बढ़ाई जा सकेगी. इस फैसले से न केवल अभिभावकों को राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी संतुलन और जवाबदेही सुनिश्चित होगी.

    फैसले में यह भी कहा गया है कि स्कूल अब हर साल किताबें और यूनिफॉर्म बदलने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे. कम से कम पांच वर्षों तक किताबें और ड्रेस नहीं बदली जाएंगी. साथ ही, एनसीईआरटी के अलावा अन्य किताबें लेना अनिवार्य नहीं होगा. अभिभावक अपनी सुविधा से कहीं से भी किताबें और यूनिफॉर्म खरीद सकेंगे.

    स्कूलों द्वारा लिए जाने वाले बस शुल्क को भी नियंत्रित रखने की बात कही गई है. इसे सामान्य नियमों के तहत ही बढ़ाया जा सकेगा. इसके अलावा, किसी भी छात्र को फीस के कारण परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा और परीक्षा के दौरान कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.

    एडमिशन फीस को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. यह शुल्क वास्तविक लागत के आधार पर ही लिया जाएगा और एक बार एडमिशन होने के बाद दोबारा एडमिशन फीस नहीं ली जा सकेगी. वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटों पर नामांकन सुनिश्चित करना भी अनिवार्य किया गया है.

    प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. शिकायत के लिए विशेष व्यवस्था की गई है और दोषी पाए जाने पर 2.5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. कुल मिलाकर, यह फैसला अभिभावकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है और निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.


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