शहर की सरकार कैसे करती है काम, कहां से आता है पैसा, जानिए स्टेप बाय स्टेप पूरा प्रोसेस

    शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि नगर निगम आखिर क्या होता है, इसके फैसले कैसे लिए जाते हैं और शहर के विकास के लिए पैसा कहां से आता है. इन सवालों के जवाब हर किसी को स्पष्ट रूप से नहीं पता होते. ऐसे में आइए आपको समझाते हैं कि झारखंड के नगर निगम कैसे काम करते हैं और उनकी भूमिका क्या होती है.

    शहर की सरकार कैसे करती है काम, कहां से आता है पैसा, जानिए स्टेप बाय स्टेप पूरा प्रोसेस

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि नगर निगम आखिर क्या होता है, इसके फैसले कैसे लिए जाते हैं और शहर के विकास के लिए पैसा कहां से आता है. इन सवालों के जवाब हर किसी को स्पष्ट रूप से नहीं पता होते. ऐसे में आइए आपको आसान भाषा में समझाते हैं कि झारखंड नगर निगम कैसे काम करते हैं और उनकी भूमिका क्या होती है.

    झारखंड में कितने नगर निगम हैं

    झारखंड के शहरी विकास की जिम्मेदारी नगर निगमों पर होती है. राज्य में कुल 9 नगर निगम सक्रिय हैं, जिनमें रांची, धनबाद, देवघर, चास, आदित्यपुर, गिरिडीह, हजारीबाग, मेदिनीनगर और मानगो शामिल हैं. ये नगर निगम शहरों में साफ-सफाई, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज सिस्टम और टैक्स संग्रह जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं,

    नगर निगम की संरचना कैसे होती है

    नगर निगम का काम मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटा होता है

    1. राजनीतिक व्यवस्था

    इसमें मेयर, डिप्टी मेयर और वार्ड पार्षद शामिल होते हैं. मेयर को शहर का प्रथम नागरिक माना जाता है और वह निगम की बैठकों की अध्यक्षता करता है. वार्ड पार्षद जनता द्वारा चुने जाते हैं और अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठाते हैं.

    1. प्रशासनिक व्यवस्था

    इसमें नगर आयुक्त (आमतौर पर IAS या राज्य सेवा अधिकारी) के साथ इंजीनियर, हेल्थ ऑफिसर और टैक्स अधिकारी शामिल होते हैं. ये अधिकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने का काम करते हैं.

    मेयर और पार्षद की क्या भूमिका होती है

    मेयर शहर के विकास से जुड़े बड़े फैसले लेने, योजनाओं को दिशा देने और सरकार व नगर निगम के बीच समन्वय बनाने का काम करता है. डिप्टी मेयर, मेयर की अनुपस्थिति में जिम्मेदारियां संभालता है और योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करता है. वार्ड पार्षद अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाकर उनके समाधान के लिए काम करते हैं.

    नगर निगम की आय मुख्य रूप से तीन स्रोतों से होती है

    1. खुद की आय इसमें प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर टैक्स, ट्रेड लाइसेंस, विज्ञापन शुल्क आदि शामिल हैं.
    2. राज्य सरकार से फंड: झारखंड सरकार अपने बजट से हर साल नगर निगमों को राशि देती है.
    3. केंद्र सरकार से फंड: स्मार्ट सिटी मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी योजनाओं के तहत केंद्र सरकार भी फंड देती है.

    पैसा कहां खर्च होता है

    नगर निगम को मिलने वाला फंड शहर की बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाता है, जैसे सड़क और पुल निर्माण, पानी सप्लाई, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट और ड्रेनेज सिस्टम।

    बजट कैसे तैयार होता है

    नगर निगम का बजट एक तय प्रक्रिया के तहत बनता है. सबसे पहले सभी विभाग अपनी जरूरतें बताते हैं. इसके बाद अकाउंट विभाग बजट तैयार करता है, जिसे स्टैंडिंग कमेटी से मंजूरी मिलती है. फिर नगर निगम बोर्ड इसे पास करता है और अंत में राज्य सरकार की स्वीकृति मिलती है. झारखंड के नगर निगम शहरी विकास की रीढ़ माने जाते हैं. हालांकि फंडिंग तीन स्तर स्थानीय, राज्य और केंद्र से होती है, लेकिन सही टैक्स वसूली और बेहतर योजना के बिना विकास की गति धीमी हो सकती है. आने वाले समय में डिजिटल सिस्टम और पारदर्शिता से नगर निगमों की कार्यप्रणाली और मजबूत होने की उम्मीद है.

     


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