क्या नीतीश कुमार के रहते बिहार में शराबबंदी बनने जा रहा बड़ा मुद्दा,एनडीए में ही विरोध क्यों!

    क्या नीतीश कुमार के रहते बिहार में शराबबंदी बनने जा रहा बड़ा मुद्दा,एनडीए में ही विरोध क्यों!

    TNP DESK- बिहार में शराबबंदी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है.  कुछ लोग शराबबंदी की वकालत कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसे खत्म करने की डिमांड कर रहे हैं.  यह काम केवल विपक्षी दलों में नहीं, बल्कि एनडीए में भी  हो रहा है.  वैसे जनसुराज  के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने तो पहले ही घोषणा की थी कि अगर उनकी पार्टी सरकार में आएगी, तो 5 मिनट में शराबबंदी को खत्म कर देगी।  हालांकि उन्हें एक भी सीट नहीं मिली थी.   इधर, शराबबंदी को लेकर एनडीए नेताओं में भी अलग-अलग राय सामने आ रही है.  

    मोकामा के बाहुबली विधायक ने क्या की थी मांग 

    मोकामा के बाहुबली विधायक ,जो जदयू से आते हैं, उन्होंने शराबबंदी खत्म करने की मांग  उठा दी है.  तो नीतीश कुमार सरकार में भाजपा कोटे से मंत्री दिलीप जायसवाल ने उन्हें सलाह भी दे दी है.  दिलीप जायसवाल ने नाम तो किसी का नहीं लिया, लेकिन कहा कि शराबबंदी हटाने की मांग करने वाले को पहले उसकी अच्छाई पर विचार करना चाहिए।  दिलीप जायसवाल ने यह भी  कहा कि सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन क्या रास्ता निकल सकता है, इसकी भी चर्चा होनी चाहिए।  दरअसल, दुलारचंद हत्याकांड में जमानत पर जेल से छूटने के बाद मोकामा विधायक अनंत  सिंह एक सप्ताह से अपने बयानों को लेकर चर्च में हैं.  नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री नहीं रहने पर उन्होंने आगे चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी है.  कह दिया है कि अब उनके बाल -बच्चे जनता की सेवा करेंगे।  

    बिहार में क्या सच में बढ़ गया है सूखे नशे का प्रचलन 

    अभी हाल ही में अनंत  सिंह ने कहा था कि शराबबंदी जिस उद्देश्य से  लागू की गई थी, वह पूरा नहीं हुआ.  कई लोग आज भी शराब पी रहे है.  तस्करी बढ़ गई है.  शराबबंदी के बाद सूखे  नशे का चलन बढ़  गया है.  बुधवार को उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि शराबबंदी और सूखा  नशा दोनों अलग-अलग हैं.  उल्लेखनीय है कि बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है.  राज्य में शराब के उत्पादन, बिक्री और सेवन पर पूर्णत प्रतिबंध है.  यह बात भी सच है कि बिहार में शराबबंदी होने के बाद पड़ोसी राज्यों से तस्करी बढ़ गई है.  दूसरी ओर सूखे  नशे का प्रचलन भी बढ़ गया है.  शराबबंदी की समीक्षा की कई बार मांग उठती रही है.  पिछले बिहार  विधानसभा के बजट सत्र में भी विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भी कई विधायक शराबबंदी पर सवाल उठाये थे.  

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो



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