TNP DESK- पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण राज्य पश्चिम बंगाल में भाजपा की लालसा पूरी हो गई है. भाजपा पूरी तरह से गदगद है. बंगाल जीत के बाद भाजपा कह रही है कि गंगोत्री से गंगासागर तक पार्टी की सियासी यात्रा अब पूरी हो गई है. वैसे लोगों का कहना है कि झारखंड अभी इसमें पेंच फंसा कर रखे हुए है. सभी जानते हैं कि उत्तराखंड की गंगोत्री से निकलकर जो गंगा बंगाल में गंगासागर में मिलती है, वह झारखंड होकर जाती है. इसलिए अभी झारखंड को जीते बिना भाजपा की यह यात्रा पूरी नहीं कही जा सकती है. झारखंड के साहिबगंज से गंगा बहती है और वह गंगासागर में जाकर मिल जाती है.
झारखंड के संथाल में मजबूत नहीं हो पाई है भाजपा
झारखंड के संथालपरगना में भाजपा की पकड़ मजबूत नहीं कहीं जा सकती है. विधानसभा चुनाव में भाजपा संथालपरगना की सीटों पर जोर तो लगाई , लेकिन जीत नहीं सकी। यह अलग बात है कि बंगाल के आदिवासी बहुल सीट पर भाजपा की जीत हुई है. लेकिन संथालपरगना में आदिवासी सीट पर भाजपा कब्जा नहीं कर पाई है. यह अलग बात है कि ममता बनर्जी ने 2011 में 34 वर्षों के कम्युनिस्ट शासन को उखाड़ फेंका था. उस समय ममता बनर्जी ने मां, माटी और मानुष का नारा देकर सत्ता में आई थी. जानकार बताते हैं कि झारखंड का संथाल परगना जनजाति बहुत क्षेत्र है. बंगाल और संथाल परगना की जनजातियों में काफी समानताएं भी हैं. सामाजिक ,आर्थिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी है. इसके बाद भी राजनीतिक भिन्नता है.
बंगाल में जनजातीय समुदाय ने तो इसबार भाजपा को किया वोट
बंगाल में जनजातीय समुदाय ने भाजपा को वोट किया। पुरुलिया, बांकुड़ा , झाड़ग्राम, मेदिनीपुर और उत्तरी बंगाल के जिलों में आदिवासी आबादी की बहुलता है. वहां भाजपा सफल रही, लेकिन झारखंड के संथाल परगना में भाजपा पिछले दो चुनाव से पिछड़ती रही है. झारखंड की आदिवासी सीटों पर भाजपा कामयाब नहीं हो पा रही है, लेकिन 2026 के चुनाव में बंगाल में भाजपा को कामयाबी मिली है. 2011 में ममता बनर्जी ने जब 34 साल के शासन का अंत किया, तो उनकी छवि एक लड़ाकू नेता के रूप में स्थापित हो गई. लगातार तीन बार वह बंगाल की मुख्यमंत्री रही. 2026 के चुनाव में उन्हें करारी हार मिली है. हालांकि इस हार को ममता बनर्जी "वोट लूट " से जोड़ रही है और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने की बात पर अ ड़ी हुई है. बहरहाल , जो भी हो लेकिन ममता बनर्जी को "स्ट्रीट फाइटर" माना जाता है. वह अब पूरे देश में विपक्षी एकता की बात कह रही हैं. बंगाल में चुनाव जीतने से भाजपा जहां उत्साहित है, वहीं तृणमूल कांग्रेस पर संकट के बादल घिरते दिख रहे हैं.

