फ्लाईदुबई के पायलट स्मिथ मच्छार के साहस को आज दुनिया कर रही सलाम

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Digital News Desk • October 4, 2026

सैकड़ों लोगों की जान बचाना ही सच्चा गौरव है। फ्लाईदुबई के पायलट स्मिथ मच्छार ने अपने साहस, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा से हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.ये बातें केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने गढ़वा पहुंचने पर कहीं.उन्होंने पायलट स्मिथ मच्छार के साहसिक कदम की जमकर सराहना की और कहा कि पूरी दुनिया आज उनके साहस की मुरीद है.

सैकड़ों लोगों की जान बचाना ही सच्चा गौरव है.फ्लाईदुबई के पायलट स्मिथ मच्छार ने अपने साहस, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा से हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.ये बातें केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने गढ़वा पहुंचने पर कहीं.उन्होंने पायलट स्मिथ मच्छार के साहसिक कदम की जमकर सराहना की और कहा कि पूरी दुनिया आज उनके साहस की मुरीद है.

वडनगर से वाराणसी तक निकली मोटरसाइकिल यात्रा के छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर स्वागत के लिए गढ़वा पहुंचे रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने फ्लाईदुबई के पायलट स्मिथ मच्छार की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा लोगों की जान बचाने और मानवता की रक्षा करने की रही है. हम बुद्ध के उपासक हैं, लेकिन अगर कोई हमें छेड़ता या परेशान करता है तो शिव का तांडव करना भी जानते हैं. संजय सेठ ने कहा कि संकट की घड़ी में स्मिथ मच्छार ने जिस धैर्य, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया, उससे सैकड़ों लोगों की जान बची. यही भारतीय संस्कृति है. उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं ने भी स्मिथ मच्छार के साहस की सराहना की है. उन्होंने कहा कि दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्मिथ मच्छार से बातचीत की थी.बातचीत के दौरान स्मिथ ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना आइकॉन बताया और कहा कि संकट की घड़ी में वह हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे.रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि स्मिथ मच्छार के स्वस्थ होने और दीर्घायु की हम सभी कामना करते हैं.उनका साहस देश के लिए गौरव का विषय है.

वहीं, विपक्ष पर निशाना साधते हुए संजय सेठ ने कहा कि जब भारत की बेटियां 44 साल बाद गोल्ड मेडल जीतती हैं तो विपक्ष के नेता उन्हें बधाई तक नहीं देते. उन्होंने कहा कि भारत ने कई पदक जीते, पूरी दुनिया से बधाइयां आईं, लेकिन विपक्ष की ओर से कोई शुभकामना नहीं आई. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष को न भारत का विकास पसंद है, न चुनाव आयोग और न ही देश की मजबूत होती अर्थव्यवस्था. उन्होंने कहा कि लगातार हार के बावजूद विपक्ष ने सबक नहीं लिया है. अब उनका एक ही कर्तव्य रह गया है—मैं, मेरी मां, मेरी बहन और मेरी कुर्सी. ऐसे लोगों से आखिर क्या उम्मीद की जा सकती है.