चतरा (CHATRA): वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे गए टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू का शव सोमवार को उनके पैतृक गांव लुटू सोहावन पहुंचा. शव पहुंचने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों और परिचितों की भीड़ जुटने लगी. अंतिम संस्कार को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने गांव में सुरक्षा बढ़ा दी है. अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है और आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है. सुरक्षा व्यवस्था के बीच गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की तैयारी की गई. इधर, बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब टीएसपीसी के 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर शशिकांत गंझू पर है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव निवासी शशिकांत संगठन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले कमांडरों में शामिल है. वह एनआईए के मामलों में भी वांटेड बताया जाता है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शशिकांत का प्रभाव क्षेत्र मुख्य रूप से पलामू और चतरा रहा है. उसके खिलाफ पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग समेत उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है. बताया जाता है कि वह 2000 के दशक में माओवादी संगठन से जुड़ा था और बाद में बृजेश गंझू के संपर्क में आने के बाद टीएसपीसी में शामिल हुआ. पुलिस के मुताबिक, शशिकांत अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहता है और 2010 के बाद सुरक्षा बलों के साथ हुई दो दर्जन से अधिक मुठभेड़ों में बच निकल चुका है. सितंबर 2025 में मनातू के केदल गांव में हुई मुठभेड़ में भी वह बच गया था. उस दौरान दो पुलिस जवान संतन मेहता और सुनील राम शहीद हुए थे. बृजेश के खात्मे के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां शशिकांत की गतिविधियों और संगठन के बचे नेटवर्क पर विशेष नजर बनाए हुए हैं.