स्वच्छता सर्वेक्षण में बासुकीनाथ की करारी फजीहत! करोड़ों खर्च के बाद भी सफाई की परीक्षा में क्यों फेल हुआ नगर निकाय?

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Digital News Desk • September 10, 2026

दुमका (DUMKA): गंदगी सिर्फ शहर की सूरत बिगाड़ती ही नहीं, बल्कि बीमारियों और जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर परेशानियों का कारण भी बनती है. यही वजह है कि केंद्र सरकार की ओर से देशभर में स्वच्छता को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जाते हैं. शहरों की सफाई और स्वच्छता व्यवस्था को परखने के लिए प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण भी कराया जाता है, जिसमें विभिन्न मानकों के आधार पर नगर निकायों का मूल्यांकन किया जाता है.

बासुकीनाथ को नहीं मिली जगह, उठे व्यवस्था पर सवाल
विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 में दुमका के बासुकीनाथ नगर पंचायत को कोई स्थान नहीं मिला. बासुकीनाथ नगर पंचायत का सर्वेक्षण में प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर पाना अब सफाई व्यवस्था के साथ-साथ जिम्मेदार तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है.

बाबा बासुकीनाथ की नगरी, लेकिन सफाई के मामले में फिसड्डी क्यों?
बासुकीनाथ नगर पंचायत क्षेत्र में देश विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बाबा बासुकीनाथ धाम स्थित है. यहां हर वर्ष मासव्यापी राजकीय श्रावणी मेला आयोजित होता है और लाखों श्रद्धालु फौजदारी बाबा पर जलार्पण करने पहुंचते हैं. ऐसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

सफाई पर करोड़ों का खर्च, फिर भी सर्वेक्षण से बाहर—पैसा गया कहां?
सबसे बड़ा सवाल सफाई व्यवस्था पर होने वाले खर्च को लेकर है. इस वर्ष श्रावणी मेला के दौरान सफाई व्यवस्था के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक का टेंडर किए जाने की बात सामने आई है. वहीं भादो मेला में सफाई व्यवस्था के लिए करीब 24 लाख रुपये का टेंडर हुआ. इसके अलावा वर्ष के बाकी महीनों में भी सफाई व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सफाई के नाम पर इतनी बड़ी रकम खर्च हो रही है, तो स्वच्छता सर्वेक्षण में उसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दिया?

श्रद्धालुओं के शहर की सफाई व्यवस्था पर लगा बड़ा दाग
बासुकीनाथ सिर्फ एक नगर पंचायत नहीं, बल्कि झारखंड सहित देश के अलग अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. श्रावणी मेले के दौरान यहां उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के बीच सफाई व्यवस्था सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यक्षमता का आईना बन जाती है. ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ना महज एक रैंकिंग का मामला नहीं, बल्कि शहर की व्यवस्था पर गंभीर सवाल माना जा रहा है.

नगर पंचायत अध्यक्ष बोलीं : शर्मनाक, संसाधनों की कमी भी बड़ी चुनौती
बासुकीनाथ नगर पंचायत अध्यक्ष वीणा देवी ने स्थिति को शर्मनाक बताया है. उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले ही उन्होंने पद संभाला है. अध्यक्ष ने संसाधनों की कमी को चुनौती बताते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में बासुकीनाथ का प्रदर्शन बेहतर हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे.

ब्रांड एम्बेसडर ने भी जताई नाराजगी, ‘बासुकीनाथ से श्रद्धालु क्या संदेश लेकर जाते होंगे?’
बासुकीनाथ नगर पंचायत के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर सह पंडा धर्म रक्षिणी सभा के अध्यक्ष मनोज पंडा ने भी इसे निंदनीय बताया. उन्होंने कहा कि बासुकीनाथ केवल नगर पंचायत नहीं, बल्कि देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. ऐसे में यहां की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर प्रशासन को गंभीरता से काम करना चाहिए.

प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान की चर्चा, लेकिन बासुकीनाथ की तस्वीर सवालों में
मनोज पंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान की चर्चा देशभर में होती है. ऐसे में बासुकीनाथ आने वाला श्रद्धालु यदि यहां की सफाई व्यवस्था से निराश होकर लौटता है, तो इससे शहर की छवि पर असर पड़ना स्वाभाविक है. आखिर स्वच्छता के नाम पर खर्च होने वाली बड़ी रकम के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं दिख रहा, इसका जवाब जिम्मेदार अधिकारियों और नगर निकाय को देना होगा.

अब सिर्फ टेंडर नहीं, जमीन पर दिखे सफाई, जवाबदेही तय करने की मांग
राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ने के बाद अब जरूरत सिर्फ नए टेंडर और कागजी दावों की नहीं, बल्कि जमीन पर साफ-सफाई की ठोस व्यवस्था और खर्च की जवाबदेही की है. बासुकीनाथ जैसे धार्मिक शहर में यदि सफाई व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते हैं, तो प्रशासन को यह भी देखना होगा कि बजट का कितना हिस्सा वास्तव में सफाई पर प्रभावी ढंग से खर्च हो रहा है और उसका परिणाम शहर की सड़कों, गलियों, नालियों तथा मेला क्षेत्र में कितना दिखाई दे रहा है.