आदिवासी शक्ति का आज होगा महाजुटान! मोरहाबादी में जनसभा, परिसीमन के खिलाफ उठेगी आवाज

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Digital News Desk • August 30, 2026

रांची का मोरहाबादी मैदान रविवार को आदिवासी समाज की बड़ी रैली का गवाह बनने जा रहा है. यहां आदिवासी एकता महाजुटान महारैली का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें परिसीमन के प्रस्ताव और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में लोग जुटेंगे. रैली की शुरुआत सुबह 11 बजे से होगी.

 

 

रांची (RANCHI): राजधानी रांची का मोरहाबादी मैदान रविवार को आदिवासी समाज की बड़ी रैली का गवाह बनने जा रहा है. यहां आदिवासी एकता महाजुटान महारैली का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें परिसीमन के प्रस्ताव और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में लोग जुटेंगे. रैली की शुरुआत सुबह 11 बजे से होगी. आयोजन को लेकर सुबह से ही मोरहाबादी मैदान में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है. रैली की तैयारियों का जायजा लेने के लिए पूर्व विधायक बंधु तिर्की और केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की भी आयोजन स्थल पहुंचे. दोनों नेताओं ने मैदान का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली. निरीक्षण के दौरान जहां भी कमियां नजर आईं, उन्हें जल्द दूर करने का निर्देश संबंधित लोगों को दिया गया.

आयोजकों के मुताबिक, महाजुटान में झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों के पहुंचने की उम्मीद है. रैली में कांग्रेस नेता बंधु तिर्की, दयामनी बरला, रमा खलखो, आदिवासी नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा, अजय तिर्की और शिवा कच्छप समेत कई प्रमुख चेहरे शामिल होंगे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ-साथ सत्ता पक्ष और विपक्ष से जुड़े आदिवासी सांसदों और विधायकों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है. आयोजकों के अनुसार, मध्यप्रदेश समेत दूसरे राज्यों के कुछ आदिवासी नेता भी महाजुटान में हिस्सा ले सकते हैं.

परिसीमन को लेकर क्यों है विरोध?

महाजुटान के आयोजकों का मुख्य विरोध प्रस्तावित परिसीमन को लेकर है. उनका दावा है कि नए परिसीमन में आदिवासी आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है. बंधु तिर्की का कहना है कि वर्ष 2006-07 में भी झारखंड में परिसीमन को लेकर ऐसा प्रस्ताव सामने आया था, जिसके बाद आदिवासी आरक्षित सीटों को लेकर आशंका पैदा हुई थी. उस समय विरोध के कारण राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी. आयोजकों का तर्क है कि झारखंड पांचवीं अनुसूची के तहत आने वाला राज्य है. ऐसे में परिसीमन के दौरान यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाया गया, तो आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या घटने की संभावना बन सकती है. इसी मुद्दे को लेकर महाजुटान के जरिए केंद्र और राज्य सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी है.

रैली में परिसीमन के अलावा पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून, खनन से जुड़े केंद्र के हालिया कानून, विस्थापन और पलायन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी. इन विषयों पर प्रस्ताव पारित किए जाने की भी बात कही गई है. आयोजकों ने महाजुटान को आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया है. अब नजर इस बात पर है कि मोरहाबादी मैदान में होने वाला यह जुटान कितना बड़ा आकार लेता है और इसके जरिए सरकार के सामने कौन-कौन से मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाते हैं.