बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की उच्च शिक्षा को लेकर बड़ा ऐलान किया है. सहायक प्राध्यापकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के 100 असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन कर उन्हें एक महीने की ट्रेनिंग के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी भेजा जाएगा. इसकी पूरी व्यवस्था बिहार का उच्च शिक्षा विभाग करेगा. मुख्यमंत्री ने कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति को लेकर भी सख्ती बरतने की बात कही. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए 75 प्रतिशत अटेंडेंस सुनिश्चित की जानी चाहिए.
100 असिस्टेंट प्रोफेसर को मिलेगी एक महीने की ट्रेनिंग
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने वाले 100 असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन किया जाएगा. इन शिक्षकों को एक महीने की ट्रेनिंग के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी भेजने की योजना है.
उन्होंने कहा कि इस पहल को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग की होगी. इसका मकसद शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक अनुभव से जोड़ना है, ताकि इसका फायदा आगे छात्रों को भी मिल सके.
छात्रों की 75 प्रतिशत अटेंडेंस पर जोर
मुख्यमंत्री ने कॉलेजों में छात्रों की नियमित पढ़ाई को लेकर भी असिस्टेंट प्रोफेसर से बात की. उन्होंने कहा कि कॉलेज आने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई और उपस्थिति पर खास ध्यान दिया जाए.
उन्होंने साफ कहा कि छात्रों को किसी भी हालत में कम से कम 75 प्रतिशत क्लास करनी होगी. अगर कोई छात्र दूसरी तैयारी या हायर एजुकेशन से जुड़े किसी काम के नाम पर लगातार क्लास छोड़ता है, तो उसे बिना वजह छुट्टी नहीं दी जाए. पहले उसकी नियमित पढ़ाई और जरूरी अटेंडेंस पूरी होनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से इस व्यवस्था पर नजर रखने को कहा.
बिहार में बाढ़ के स्थायी समाधान पर होगा काम
शिक्षा के साथ मुख्यमंत्री ने बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राज्य को हर साल बाढ़ के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है और अब सरकार इसके स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहती है.
मुख्यमंत्री ने गंडक, सोन और गंगा जैसी प्रमुख नदियों का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार आगे काम करेगी. उन्होंने नदियों के चैनल को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही.
सम्राट चौधरी के संबोधन में इस तरह उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, कॉलेजों में छात्रों की नियमित उपस्थिति और बिहार की बाढ़ समस्या तीन प्रमुख मुद्दे रहे.
