57 दिनों तक चलने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा शुक्रवार से विधिवत शुरू हो गई. इस वर्ष यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी और प्रशासन को उम्मीद है कि चार लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के पवित्र हिमलिंग के दर्शन करेंगे. यात्रा के पहले दिन 4,822 श्रद्धालुओं का पहला जत्था 259 वाहनों के काफिले के साथ जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बालटाल और पहलगाम मार्ग के लिए रवाना हुआ.
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर व्यापक इंतजाम किए हैं. दोनों प्रमुख मार्गों पर हर एक से दो किलोमीटर की दूरी पर ऑक्सीजन बूथ स्थापित किए गए हैं, ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सांस लेने में परेशानी होने पर यात्रियों को तुरंत सहायता मिल सके. इसके अलावा मेडिकल सेंटर, एंबुलेंस और आपातकालीन सहायता दल भी पूरे यात्रा मार्ग पर तैनात किए गए हैं.
बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर 100-100 बेड वाले अस्थायी अस्पताल बनाए गए हैं. इन अस्पतालों में करीब 1,000 डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई है, जो चौबीसों घंटे श्रद्धालुओं को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराएंगे. प्रशासन ने आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए विशेष चिकित्सा टीमों और आवश्यक दवाइयों की भी पर्याप्त व्यवस्था की है.
इस बीच मौसम विभाग ने 6 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना जताई है. इसे देखते हुए यात्रा मार्ग पर कई वाटरप्रूफ शेल्टर बनाए गए हैं, जहां खराब मौसम के दौरान श्रद्धालु सुरक्षित ठहर सकेंगे. साथ ही यात्रियों को लगातार मौसम संबंधी अपडेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है, ताकि वे सुरक्षित तरीके से अपनी यात्रा पूरी कर सकें.
बालटाल बेस कैंप में एक साथ लगभग 30 हजार श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा विकसित की गई है. प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाओं के व्यापक इंतजामों के साथ इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा को श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है.
