नई EPF योजना लागू, अब 1,800 रुपये तक ही अनिवार्य पीएफ कटौती

 

THENEWSPOST
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Digital News Desk • July 3, 2026

केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए नई ईपीएफ योजना-2026 लागू कर दी है. इस नई व्यवस्था ने वर्ष 1952 से लागू पुरानी ईपीएफ योजना का स्थान ले लिया है. सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य ईपीएफ प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाना है, जिससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को सुविधा मिल सके.

केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए नई ईपीएफ योजना-2026 लागू कर दी है. इस नई व्यवस्था ने वर्ष 1952 से लागू पुरानी ईपीएफ योजना का स्थान ले लिया है. सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य ईपीएफ प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाना है, जिससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को सुविधा मिल सके.

नई योजना के तहत कंपनियों के लिए अब 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा के आधार पर अधिकतम 1,800 रुपये, यानी 12 प्रतिशत ईपीएफ अंशदान करना ही अनिवार्य होगा. यदि किसी कर्मचारी का वेतन इससे अधिक है और वह अपने भविष्य निधि खाते में 1,800 रुपये से अधिक राशि जमा कराना चाहता है, तो वह स्वेच्छा से अतिरिक्त योगदान कर सकता है. हालांकि, उस अतिरिक्त राशि के बराबर योगदान देना नियोक्ता के लिए अनिवार्य नहीं होगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से कई कर्मचारियों की मासिक इन-हैंड सैलरी में बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि कंपनियों पर अतिरिक्त ईपीएफ योगदान का दबाव नहीं रहेगा. वहीं, दूसरी ओर कर्मचारियों की दीर्घकालिक रिटायरमेंट बचत पर इसका असर पड़ सकता है. ऐसे में कर्मचारियों को अपनी वित्तीय योजना बनाते समय अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान पर विचार करने की सलाह दी जा रही है.

नई ईपीएफ योजना में दावा निपटान प्रक्रिया को भी अधिक जवाबदेह बनाया गया है. अब भविष्य निधि निकासी, पेंशन और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा (EDLI) से जुड़े सभी दावों का निपटारा 20 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. यदि निर्धारित समय सीमा में बिना उचित कारण के दावे का निपटान नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. साथ ही विलंब की स्थिति में 12 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज का भुगतान भी करना होगा.

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से कर्मचारियों को समय पर सेवाएं मिलेंगी, शिकायतें कम होंगी और ईपीएफ प्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही और अधिक मजबूत होगी.