टीएनपी डेस्क (TNP DESK): ममता बनर्जी के बारे में कहा जाता है कि वह "स्ट्रीट फाइटर" हैं. हार मानने वाली महिला नहीं हैं. बंगाल की सत्ता से बेदखल होने के बाद उनकी नजर विपक्षी एकता की ओर गई है. यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि पूर्व में विपक्षी एकता के सूत्रधार नीतीश कुमार बने थे. उसे समय उन्होंने तेजस्वी यादव के साथ कई राज्यों का दौरा भी किया था. उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक किसी गठबंधन में शामिल होने से इंकार कर दिया था. गठबंधन का संयोजक बनाने की बात चली तो ममता बनर्जी ने नीतीश कुमार के नाम पर आपत्ति की और गठबंधन से अप्रत्यक्ष रूप से अलग हो गई. लेकिन अब ममता बनर्जी एक बार फिर विपक्षी एकता की वकालत कर रही हैं.
राहुल गाँधी से ममता बनर्जी की क्या हुई बात
जानकारी के अनुसार उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से टेलीफोन पर बात की है. कहा जा रहा है कि बंगाल में एक सौ सीट पर धांधली के आरोप पर राहुल गांधी ने भी सहमति जताई है. चर्चा पर भरोसा करें तो दिल्ली में विपक्षी नेताओं की एक बैठक जल्द हो सकती है. बताया जा रहा है कि इस बैठक में मतदान में धांधली को मुद्दा बनाकर देश भर में घूमने की रणनीति तय की जाएगी. साथ ही बैठक में असम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के मतदान की समीक्षा होगी. आयोग की भूमिका पर भी चर्चा की जाएगी. ममता बनर्जी का आरोप है कि भाजपा ने वोटो की "लूट" की है. उनकी पिटाई हुई है, उन्हें जबरन हराया गया है. भाजपा ने आयोग की मदद से 100 सीटों की "लूट" की है.
ममता बनर्जी ने क्यों कहा कि वह फिर सत्ता में लौटेंगीं
इसके बाद ममता बनर्जी ने कहा कि वह दोबारा सत्ता में लौंटेंगी. इस बीच जानकारी मिली है कि 9 मई को बंगाल में भाजपा का शपथ ग्रहण समारोह होगा. नेता का नाम तय करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कोलकाता पहुंचेंगे, उसके बाद मुख्यमंत्री के नाम तय होंगें. भाजपा को मिली जीत से बंगाल में बहस छिड़ गई है कि आखिर बंगाल का सीएम कौन होगा? सीएम के पद के लिए चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और इसमें शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे आगे लिया जा रहा है. यहां बताना जरूरी है कि शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी के कभी बहुत खास हुआ करते थे. लेकिन अब सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आए हैं.
मुख्यमंत्री के रूप में में किसकी हो रही अधिक चर्चा
मुख्यमंत्री के रूप में शुभेंदु अधिकारी की चर्चा इसलिए अधिक हो रही है कि वह पिछले कुछ वर्षों में खुद को भाजपा के कट्टर हिंदुत्व के चेहरे के रूप में स्थापित किया है. वह लगातार तुष्टिकरण की राजनीति पर ममता बनर्जी को घेरते रहे हैं. शुभेंदु अधिकारी एकमात्र ऐसा नेता है, जो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर तीखा और सीधा हमला करते रहे हैं. लोग बताते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री से उनकी निकटता है, यह अलग बात है कि शुभेंदु अधिकारी ने कभी ममता बनर्जी को अपना गुरु माना था, लेकिन अब उनके राजनीतिक गुरु अमित शाह बन गए हैं. अमित शाह बंगाल चुनाव प्रचार में कहते रहे हैं कि बंगाल का मुख्यमंत्री कोई धरतीपुत्र ही बनेगा. शुभेंदु अधिकारी खुद को धरतीपुत्र भी बताते हैं. बताया जाता है कि वह एक सुलझे हुए संगठन कर्ता के साथ-साथ फायर ब्रांड नेता भी हैं. हालांकि भाजपा आला कमान ने अबतक इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा है. बंगाल में भाजपा के और भी नेता हैं, लेकिन संकेत बता रहे हैं कि शुभेंदु अधिकारी के नाम पर ही मुहर लग सकती है. हालांकि इसमें अभी वक्त है. जनसंघ के सह संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती पर पहली बार भगवा लहरा है और भाजपा के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि हैं.

