97 साल बाद बदली भारतीय हॉकी की पहचान, नीली जर्सी की जगह भगवा क्यों?

  • July 31, 2026 3:04 pm
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भारतीय हॉकी की पहचान दशकों से नीली जर्सी रही है. ओलंपिक से लेकर विश्व कप तक टीम इंडिया इसी रंग में खेलती आई है. लेकिन अब 2026 FIH हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम पहली बार भगवा (Saffron) जर्सी में नजर आएंगी. हॉकी इंडिया इसे तकनीकी जरूरत और भारतीय संस्कृति से जुड़ा फैसला बता रही है, जबकि कई पूर्व खिलाड़ी इसे टीम की ऐतिहासिक पहचान से समझौता मान रहे हैं. आइए जानते हैं इस पूरे बदलाव की कहानी.

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भारतीय हॉकी के इतिहास में पहली बार इतना बड़ा बदलाव किया गया है. करीब 97 वर्षों से टीम की पहचान रही नीली जर्सी की जगह अब भगवा जर्सी पहनने का फैसला लिया गया है. 2026 FIH हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमें इसी नई जर्सी में मैदान पर उतरेंगी. इस फैसले ने खेल जगत के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बड़ी बहस छेड़ दी है.

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हॉकी इंडिया के अनुसार यह फैसला किसी राजनीतिक या भावनात्मक वजह से नहीं, बल्कि तकनीकी आवश्यकता को ध्यान में रखकर लिया गया है. दुनिया की कई बड़ी हॉकी टीमें नीले रंग की जर्सी पहनती हैं. ऐसे में मैच के दौरान खिलाड़ियों, अंपायर और दर्शकों के लिए दोनों टीमों में अंतर करना मुश्किल हो सकता है. इसी समस्या से बचने के लिए अलग रंग की जर्सी चुनी गई है.

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हॉकी इंडिया का कहना है कि भगवा रंग भारतीय संस्कृति में साहस, त्याग, वीरता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. यही रंग भारतीय तिरंगे का भी सबसे ऊपर वाला रंग है, जो देश के सम्मान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतिनिधित्व करता है. संस्था का मानना है कि यह रंग खिलाड़ियों में आत्मविश्वास और देश के प्रति गर्व की भावना को और मजबूत करेगा.

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नई जर्सी सिर्फ रंग बदलने तक सीमित नहीं है. इसे पूरी तरह आधुनिक डिजाइन के साथ तैयार किया गया है. जर्सी पर भारतीय संस्कृति और विरासत से प्रेरित खास पैटर्न बनाए गए हैं. बेहतर फैब्रिक, हल्का वजन और खिलाड़ियों के आराम को ध्यान में रखकर इसे डिजाइन किया गया है. हॉकी इंडिया का कहना है कि इसका हर रंग और हर डिजाइन भारत की पहचान को दर्शाता है.

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नई जर्सी सामने आने के बाद कई पूर्व खिलाड़ियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए. पूर्व भारतीय कप्तान और ओलंपियन Viren Rasquinha ने इसे "Embarrassing" बताते हुए कहा कि नीली जर्सी भारतीय हॉकी की ऐतिहासिक पहचान रही है. उनके अनुसार टीम की विरासत को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है जितना नया बदलाव करना.

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नई भगवा जर्सी को लेकर लोगों की राय दो हिस्सों में बंटी हुई है. समर्थकों का कहना है कि इससे भारतीय टीम की अलग पहचान बनेगी, खिलाड़ियों की विजिबिलिटी बेहतर होगी और राष्ट्रीय गौरव भी झलकेगा. वहीं विरोध करने वालों का मानना है कि नीली जर्सी भारतीय हॉकी के स्वर्णिम इतिहास और परंपरा का हिस्सा है, इसलिए इसे बदलना सही फैसला नहीं है.

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हॉकी इंडिया के अध्यक्ष Dilip Tirkey ने स्पष्ट किया कि यह फैसला खिलाड़ियों, कप्तानों, कोच और सपोर्ट स्टाफ की सलाह के बाद लिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर विश्व कप के बाद खिलाड़ियों को नई जर्सी पसंद नहीं आती या किसी तरह की परेशानी होती है, तो भविष्य में इसमें बदलाव करने पर भी विचार किया जा सकता है.

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नीली जर्सी भारतीय हॉकी के कई ऐतिहासिक पलों की गवाह रही है. अब पहली बार टीम नई भगवा जर्सी के साथ विश्व कप में उतरेगी. यह बदलाव सफल साबित होगा या नहीं, इसका जवाब मैदान पर टीम के प्रदर्शन से मिलेगा. फिलहाल इतना तय है कि भारतीय हॉकी के इतिहास में यह फैसला आने वाले वर्षों तक चर्चा का विषय बना रहेगा.