जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा

  • July 31, 2026 1:23 pm
  • 12 Photos
  • 27 Views

कमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पदक जीतने वाले इन 12 खिलाड़ियों ने सिर्फ मेडल ही नहीं जीते, बल्कि अपने संघर्ष, मेहनत और जज़्बे से लाखों लोगों को प्रेरित किया है. किसी ने बचपन में पोलियो का सामना किया, किसी ने मजदूरी और सब्ज़ी बेचते हुए अपने सपनों को जिंदा रखा, तो कोई छोटे से गाँव और किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचा. इन खिलाड़ियों की कहानी बताती है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है.

जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा
Photo 1 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 1

पैरा एथलेटिक्स (महिला शॉट पुट F-57) हरियाणा की शर्मिला ढांकर का जीवन बचपन से ही संघर्षों से भरा रहा. महज दो साल की उम्र में पोलियो होने के कारण उन्हें शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके साथ ही घरेलू हिंसा जैसी कठिन परिस्थितियों ने भी उनके जीवन को प्रभावित किया. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खेल को अपनी ताकत बनाया. लगातार मेहनत, कठिन अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती.

Photo 2 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 2

वेटलिफ्टिंग (पुरुष 65 किग्रा) तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के कोविलपट्टी से आने वाले मुथुपांडी राजा का बचपन आर्थिक तंगी में बीता. उनका परिवार दिहाड़ी मजदूरी करके घर चलाता था. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अपना लक्ष्य बनाया. कई बार आर्थिक परेशानियों ने उनका रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अपने सपनों से समझौता नहीं किया. वर्षों की मेहनत का परिणाम उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल के रूप में मिला.

Photo 3 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 3

पैरा एथलेटिक्स (महिला शॉट पुट F-57) कर्नाटक के मैसूरु जिले के कांचीगारा कोप्पालु गाँव की रहने वाली शिल्पा के. शायला ने चार साल की उम्र में एक दुर्घटना के कारण अपना पैर खो दिया. इस घटना के बाद भी उन्होंने जिंदगी से हार नहीं मानी. कठिन प्रशिक्षण, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग से उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में अपनी पहचान बनाई. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने साबित किया कि हौसलों के सामने शारीरिक सीमाएँ भी छोटी पड़ जाती हैं.

Photo 4 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 4

पैरा पावरलिफ्टिंग (पुरुष हेवीवेट) बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले झंडू कुमार का जीवन संघर्ष की मिसाल है. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे सब्ज़ी बेचकर घर चलाने में मदद करते थे. इसके बावजूद उन्होंने खेल से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा. कठिन मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने पैरा पावरलिफ्टिंग में शानदार प्रदर्शन किया और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर लाखों युवाओं को प्रेरित किया.

Photo 5 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 5

एथलेटिक्स (पुरुष हाई जंप) महाराष्ट्र के नासिक जिले के किसान परिवार से आने वाले सर्वेश कुशारे ने बचपन से ही खेलों में रुचि दिखाई. सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने लगातार अभ्यास किया और हाई जंप में अपनी अलग पहचान बनाई. कठिन मेहनत और अनुशासन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने सिल्वर मेडल जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया.

Photo 6 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 6

वेटलिफ्टिंग (पुरुष 60 किग्रा) मणिपुर के ऋषिकांत सिंह का सफर भी चुनौतियों से भरा रहा. आर्थिक तंगी के कारण उन्हें मजदूरी करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने अपने खेल के सपने को कभी नहीं छोड़ा. दिनभर मेहनत करने के बाद भी वे नियमित अभ्यास करते रहे. उनकी लगन और मेहनत का परिणाम कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल के रूप में सामने आया.

Photo 7 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 7

वेटलिफ्टिंग (महिला 69 किग्रा) पंजाब के मैहस गाँव की हरजिंदर कौर बचपन में खेतों में परिवार के साथ चारा काटने का काम करती थीं. साधारण ग्रामीण जीवन से निकलकर उन्होंने वेटलिफ्टिंग में अपना करियर बनाया. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. लगातार मेहनत और समर्पण के बल पर उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया.

Photo 8 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 8

वेटलिफ्टिंग (महिला 53 किग्रा) छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के छोटे से गाँव भोड़िया की रहने वाली ज्ञानेश्वरी यादव ने सीमित संसाधनों में अपने खेल की शुरुआत की. ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने अपने गाँव और देश दोनों का नाम रोशन किया.

Photo 9 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 9

वेटलिफ्टिंग (महिला 58 किग्रा) मणिपुर की बिंदियारानी देवी का परिवार एक छोटी किराने की दुकान चलाता था. साधारण परिवार से आने वाली बिंदियारानी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने खेल पर पूरा ध्यान दिया. लगातार अभ्यास और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर साबित किया कि सफलता के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी बड़ा हौसला होता है.

Photo 10 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 10

वेटलिफ्टिंग (पुरुष 79 किग्रा) आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के रहने वाले वल्लूरी अजय बाबू ने मात्र 21 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता. वे गोल्ड मेडल से केवल एक किलोग्राम पीछे रहे, लेकिन उनका प्रदर्शन भारत के भविष्य के लिए बेहद उम्मीद जगाने वाला रहा.

Photo 11 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 11

एथलेटिक्स (पुरुष 10,000 मीटर) उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गाँव के किसान परिवार से आने वाले गुलवीर सिंह ने कठिन मेहनत और अनुशासित जीवनशैली के दम पर लंबी दूरी की दौड़ में अपनी पहचान बनाई. गाँव की पगडंडियों से शुरू हुआ उनका सफर कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम तक पहुँचा. उन्होंने सिल्वर मेडल जीतकर साबित किया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती.

Photo 12 of 12
जब सपनों ने हर मुश्किल को हराया: भारत के 12 पदक विजेताओं की प्रेरणा - Photo 12

वेटलिफ्टिंग (महिला 48 किग्रा) मणिपुर की मीराबाई चानू आज भारतीय खेल जगत का बड़ा नाम हैं, लेकिन उनकी शुरुआत बेहद साधारण रही. आधुनिक जिम और महंगे उपकरणों की जगह उन्होंने बचपन में बांस के डंडों और घरेलू साधनों से अभ्यास किया. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. वर्षों की मेहनत और अनुशासन के बाद उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर एक बार फिर देश को गौरवान्वित किया.