धनबाद(DHANBAD) | पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल का जब सोमवार को शपथ ग्रहण हो रहा था, तो सबकी नजर भाजपा विधायक कविता मांझी पर टिक गई थी. मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल में शामिल किए गए 35 मंत्रियों में मांझी भी शामिल थी. अब मंत्री परिषद 41 लोगों का हो गया है. आखिर कलिता मांझी की चर्चा क्यों चल रही है? आखिरकार संघर्ष से लड़ते हुए वह मंत्री पद तक कैसे पहुंची है, यह एक प्रेरणादायक कहानी है. वह पश्चिम बंगाल के औसग्राम सीट से विधायक चुनी गई है.
दूसरे के घर में झाड़ू, पोछा और बर्तन मांजती थी -----
कलिता मांझी कभी दूसरे के घर में झाड़ू, पोछा और बर्तन मांज कर महीने में ढाई हजार से ₹4000 कमाती थी. उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. उनका परिवार बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आता है. उनके पति पलंबर का काम करते है. एक बेटा है, जिसने हाल ही में 12वीं की परीक्षा दी है. परिवार का पेट पालने के लिए कलिता खुद दूसरों के घरों में घरेलू सहायिका के रूप में काम करती रही. वह 10 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में हैं. भाजपा ने कलिता पर लगातार दूसरी बार दांव खेला था. पहली बार पार्टी ने कलिता को वर्ष 2021 के चुनाव में मैदान में उतारा था. उस समय वह दूसरे नंबर पर थी. हार के बावजूद मैदान नहीं छोड़ा।
भाजपा ने दूसरी बार जताया था भरोसा ------
भाजपा ने फिर उनपर भरोसा जताया और इस बार टीएमसी के उम्मीदवार को 12000 से अधिक वोटो से पराजित कर दिया। कलिता मांझी का कहना है कि जब उन्हें टिकट मिला, तो उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए एक महीने की छुट्टी ली थी. जिन घरों में वह काम करती थी, उन परिवारों ने न केवल उन्हें आर्थिक और मानसिक संबल दिया, बल्कि जीत के लिए दुआएं भी की. शपथ लेने के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कलिता मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं भी बताई और कहा कि मंत्री बनने के बाद भी उनके पैर जमीन पर ही रहेंगे। वह अपने क्षेत्र की विकास के लिए सतत प्रयास करती रहेंगीं। उन्होंने कहा कि वह मंत्री जरूर बन गई है लेकिन आज की कलिता 5 वर्ष बाद भी वही रहेगी।