मिनी जामताड़ा बना जादूगोड़ा, साइबर अपराध का नया हॉटस्पॉट बना इलाका

मिनी जामताड़ा बना जादूगोड़ा, साइबर अपराध का नया हॉटस्पॉट बना इलाका

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): झारखंड में साइबर अपराध का नाम आते ही सबसे पहले जामताड़ा की पहचान सामने आती है लेकिन अब पूर्वी सिंहभूम जिले का जादूगोड़ा और उससे सटे इलाके कोवाली, चाकुलिया, घाटशिला तेजी से साइबर ठगी के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं. यह इलाका अब मिनी जामताड़ा के नाम से जाने जाना लगा है. पिछले तीन वर्षों में सामने आए मामलों और पुलिस जांच ने संकेत दिए हैं कि जादूगोड़ा के कोकदा, ईचड़ा, राखा माइंस, चाकुलिया, कोवाली, घाटशिला में संगठित साइबर अपराधियों का नेटवर्क सक्रिय है, जो देशभर के लोगों को ठगी का शिकार बना रहा है. मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में यूसील (यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) के एक वरिष्ठ अधिकारी के खाते से साइबर अपराधियों ने 1.25 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी कर ली. एक रिटायर्ड अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर एक करोड़ से अधिक रुपए ठगे. इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस के साथ-साथ दिल्ली और अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों ने भी जांच शुरू की. जांच में पता चला कि इलाके में साइबर अपराध का एक मजबूत नेटवर्क लंबे समय से काम कर रहा है.

197 संदिग्ध मोबाइल नंबर हुए चिन्हित
जमशेदपुर पुलिस की जांच के अनुसार हाल ही में 197 संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान की गई है. इन नंबरों से कुल 1432 सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया. कई मामलों में विदेशी संपर्कों के भी प्रमाण मिले हैं, जिनके माध्यम से ठगी के नए-नए तरीके साझा किए जाते थे. पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि साइबर अपराधी बैंक अधिकारी, तकनीकी सहायता एजेंट और निवेश सलाहकार बनकर लोगों को जाल में फंसाते हैं. फर्जी निवेश योजनाएं, क्रिप्टोकरेंसी में मुनाफे का लालच, नौकरी दिलाने का झांसा, बैंक खाता अपडेट कराने और मोबाइल चोरी के जरिए खातों से रकम उड़ाने जैसे तरीके अपनाए जा रहे हैं. बैंकिंग एजेंसियों की रिपोर्ट भी इस खतरे की पुष्टि करती है. वर्ष 2023 से 2025 के बीच विभिन्न बैंकों ने संदिग्ध लेनदेन के कारण 76 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज किया है. अपराधी छोटे-छोटे यूपीआई ट्रांजेक्शन के जरिए रकम इधर-उधर करते हैं ताकि किसी को संदेह न हो.

हाल ही में 17 पकड़े गए
जादूगोड़ा और इसके आसपास के इलाके से पुलिस अब तक 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. ये कार्रवाई 2024 से 2026 के बीच हुई. जांच में सामने आया है कि ईचड़ा निवासी राज भकत इस नेटवर्क का प्रमुख संचालक था, जिसे दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है. वहीं घाटशिला के कारोबारी परिवार से जुड़े रोहित जैन का नाम भी जांच में सामने आया है. स्थानीय लोगों और पूर्व साइबर अपराधियों के अनुसार बेरोजगारी इस समस्या की बड़ी वजह है. युवाओं को पहले तेज कमाई का लालच दिया जाता है, फिर उन्हें कोलकाता और अन्य महानगरों में ले जाकर ऐशोआराम की जिंदगी दिखाई जाती है. इसके बाद साइबर ठगी की ट्रेनिंग देकर नेटवर्क का हिस्सा बना लिया जाता है. ठगी से अर्जित रकम से कई लोगों ने परिजनों के नाम पर जमीन और मकान भी खरीदे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई और रोजगार के अवसर नहीं बढ़ाए गए, तो जादूगोड़ा आने वाले समय में जामताड़ा की तरह देशभर में साइबर अपराध के बड़े केंद्र के रूप में पहचान बना सकता है.


इनकी हुई हाल में गिरफ्तारी

 - 18 जनवरी 2024 को चाकुलिया पुलिस ने साइबर ठगी के मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था. नवीन चंद्र महतो, राम चंद्र महतो, राहुल महतो, अजय दलाई, सुजय दलाई और जय सेनगुप्ता को पकड़ा रहा था.  


- 3 अगस्त 2025 को जादूगोड़ा पुलिस ने राखामाइंस रेलवे स्टेशन से 3 साइबर अपराधी कोकदा गांव निवासी केशव चंद्र भकत, कपिलदेव भकत, गिरधारी भकत को गिरफ्तार किया था. जांच में पता चला था कि इनके खिलाफ देश भर में 29 ऑनलाइन शिकायतें दर्ज की गई थी.

- 4 अगस्त 2025 को कोवाली पुलिस ने एक नाबालिग समेत 6 साइबर ठगों को पकड़ा था. गिरफ्तार युवकों में मानिक भकत, देव भकत, कितेश भकत, एक नाबालिग, मंथन भकत उर्फ रिंकू और चिरंजीत भकत उर्फ किरण शामिल थे. यह गिरोह करीब एक साल से देशभर के लोगों को ठग रहा था.

- 15 मार्च 2026 को सीआईडी ने घाटशिला में छापेमारी कर रोहित कुमार जैन को गिरफ्तार किया था. रोहित ईडी का अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक रिटायर्ड डॉक्टर  38.62 लाख की ठगी की थी.

- 25 मार्च 2026 को दिल्ली पुलिस ने जादूगोड़ा के इचड़ा निवासी राज भकत को गिरफ्तार किया था. उसने दिल्ली के एक व्यक्ति से 7 लाख रुपए की ठगी की थी.