ठंड आने से पहले बच्चों को क्यों हो जाती है सर्दी खांसी? बदलते मौसम में इन बातों का रखें ध्यान

ठंड ने दस्तक देना शुरू कर दिया है. ऐसे में बच्चों में सर्दी-जुकाम की समस्या जल्दी देखने को मिलती है. सर्दी-जुकाम आमतौर पर वायरस के कारण होता है. ऐसे में अगर ठंड से पहले ही बच्चों की देखभाल अच्छे से करे तो बड़ी परेशानियाँ टल सकती है.

ठंड आने से पहले बच्चों को क्यों हो जाती है सर्दी खांसी? बदलते मौसम में इन बातों का रखें ध्यान

टीनपी डेस्क (TNP DESK): देश के अलग अलग हिस्सों मे ठंड ने दस्तक देना शुरू कर दिया है. सुबह में कुहासे देखने को मिल रही तो वहीं शाम में सूरज जल्दी ढल जा रहा है, ऐसे में सुबह और शाम के मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है. ऐसे में अक्सर बड़े उम्र के लोग तो ठंड से बचने के लिए कई तरीके के उपाय कर लेते है लेकिन बच्चों में इस मौसम में बदलाव का असर जल्दी देखने को मिलता है. खासकर छोटे बच्चों को सर्दी, खांसी और जुकाम जैसी परेशानियां होने लगती हैं. कई बार तो ऐसा भी देखा गया है की कई बच्चों को बार बार सर्दी-जुकाम होने से पेरेंट्स भी परेशान हो जाते है. ज्यादा सर्दी खांसी होने पर डॉक्टर की मदद जरूर लेनी चाहिए लेकिन अगर हल्की सर्दी खांसी हो तो अपने बच्चों की लाइफस्टाइल पर ध्यान देने जरूरत पड़ जताई है. ठंड पूरी तरह से शुरू होने से पहले ही बच्चों की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. सही खानपान, साफ-सफाई और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर बच्चों को संक्रमण से बचाने में मदद मिल सकती है.

बार-बार क्यों होता है जुकाम?

सर्दी-जुकाम आमतौर पर वायरस के कारण होता है. छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अभी विकसित हो रही होती है, इसलिए उन्हें संक्रमण जल्दी हो सकता है. सामान्य जुकाम के लक्षण एक से दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं. हालांकि, अगर बच्चे को बार-बार जुकाम हो रहा है या सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार और सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

बच्चों को सर्दी-जुकाम से बचाने के तरीके

खानपान का रखें ध्यान

बच्चों को दाल, हरी सब्जियां, फल और पौष्टिक भोजन दें. गर्म सूप और पर्याप्त तरल पदार्थ शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते. दूध और दूसरे डेयरी उत्पाद बंद करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सामान्य तौर पर ये बलगम नहीं बढ़ाते.

साफ-सफाई जरूरी

बच्चों के हाथ नियमित रूप से धुलवाएं. बाहर से आने के बाद हाथ साफ करें और बीमार लोगों के संपर्क से बचाने की कोशिश करें. बच्चे के कमरे को भी साफ रखें.

मौसम के अनुसार पहनाएं कपड़े

सुबह और शाम ठंड बढ़ने पर बच्चों को आरामदायक गर्म कपड़े पहनाएं. कमरे में पर्याप्त हवा आने दें और बच्चों को धुएं से दूर रखें.

पर्याप्त नींद लेने दें

अच्छी नींद बच्चों के विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी है. उनकी उम्र के अनुसार सोने और जागने का समय तय रखें.

घरेलू नुस्खों में बरतें सावधानी

एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद बिल्कुल न दें. छोटे बच्चों को अदरक का रस, लहसुन-शहद या कपूर वाला तेल बिना डॉक्टर की सलाह के न दें. नवजात शिशु की नाक के पास अजवाइन की पोटली ले जाने से भी बचें.

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

बच्चे को सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार, पानी की कमी, दूध पीने में परेशानी या असामान्य सुस्ती हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को 38 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक बुखार होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें. सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक दवाएं अपने मन से न दें, क्योंकि ये वायरस पर असर नहीं करतीं. ठंड के मौसम में थोड़ी-सी सावधानी बच्चों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है. इसलिए मौसम पूरी तरह बदलने का इंतजार न करें, अभी से उनकी सेहत का ध्यान रखें.