रांची(RANCHI): झारखंड में मुख्यमंत्री आवास निर्माण को लेकर टेडर का नोटफिकेशन जारी होते ही विपक्ष राज्य सरकार पर हमलावर हो गई.साथ ही इस निर्माण को अरविन्द केजरिवाल से जोड़ कर सवाल उठाने लगी. ऐसे में सी खबर में समझेंगे की आखिर हेमंत सोरेन सोरेन की तुलना अरविन्द केजरिवाल से क्यों की जा रही है. आखिर पूरी कहानी क्या है. कितने में मुख्यमंत्री आवास का निर्माण होना है.
सबसे पहले बात मुख्यमंत्री आवास की कर लेते है. कांके रोड में मौजूद मुख्यमंत्री आवास कई एकड़ में फैला है. लेकिन अब इसे नए रूप देने की योजना सरकार ने बनाई है. जिसमें गार्डन से लेकर पूल और जीम समेत सभी पाँच सितारा होटल जैसी व्यवस्था रहेगी. इसके निर्माण की कुल लागत 67 करोड़ रुपये तय की गई है.
बस इसी पैसे को लेकर अब विवाद खड़ा हुआ है. भाजपा का मानना है कि मुख्यमंत्री आवास में पहले से ही सारी सुविधा है. लेकिन राज्य सरकार इसे अब तोड़ कर नए आवास का निर्माण करेगी. जिसे पाँच सितारा होटल के जैसा बनाया जाएगा. ऐसे में आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी यह बताने की जरूरत है. जबकि राज्य में जरुरतमन्द को अबुआ आवास समय पर नहीं मिल रहा है. ऐसे में यह शीश महल ही राज्य की सत्ता से अहंकारी सरकार को उतार कर फेकेगी.जैसे अरविन्द केजरिवाल का चुनाव में हाल हुआ है.
प्रदेश प्रवक्ता प्रतूल शाहदेव ने कहा कि झारखंड में राजशाही चल रही है. यहां राजा रानी है और अपने ऐश मौज के लिए जनता के पैसे को उड़ा रहे है. अब शिशमहल बनाया जा रहा है. लेकिन यहां के आदिवासी को अच्छा अस्पताल नहीं मिल रहा है अबुआ आवास के इंतजार में कई साल गुजर जा रहे है. लेकिन सरकार इन सब चीजों से दूर अपनी महल बनाने की सोच रहे है. सत्ता का नशा ऐसा हो गया की यह भूल गए है कि जनता मालिक है और जब केजरिवाल को उखाड़ कर फेक दिया तो इन्हे भी सबक सिखाएगी.
Thenewspost - Jharkhand
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