भाजपा प्रदेश समिति के गठन से क्यों  धनबाद में होगा बवंडर ! कौन किसको करेगा "कट टू साइज ", जानिए क्या है गणित

    धनबाद में भाजपा संगठन को लेकर हलचल तेज हो गई है. झारखंड प्रदेश भाजपा कमेटी के गठन में धनबाद से गणेश मिश्रा को प्रदेश महामंत्री और सरोज सिंह को प्रदेश मंत्री बनाए जाने के बाद अब जिला समिति गठन की तैयारी है. इस बीच धनबाद भाजपा में गुटबाजी बढ़ने के संकेत हैं, जहां अलग-अलग खेमे अपने समर्थकों को जगह दिलाने की कोशिश में जुट सकते हैं.

    भाजपा प्रदेश समिति के गठन से क्यों  धनबाद में होगा बवंडर ! कौन किसको करेगा "कट टू साइज ", जानिए क्या है गणित

    धनबाद(DHANBAD) :  झारखंड प्रदेश भाजपा कमेटी का गठन हो गया है.  पूरे प्रदेश से 24 पदाधिकारी को जगह मिली है.  धनबाद के दो पदाधिकारी को प्रदेश में जगह मिली है.  धनबाद ग्रामीण से गणेश मिश्रा प्रदेश महामंत्री बनाए गए हैं तो धनबाद  महानगर से सरोज सिंह प्रदेश मंत्री बने है.  अब इसके बाद लगभग तय है कि बहुत जल्द जिला समिति का गठन होगा और इसके साथ ही धनबाद भाजपा में एक बार फिर घमासान की शुरुआत होगी.   क्योंकि धनबाद भाजपा में अलग-अलग गुट  और समूह में बंटे  नेता चाहेंगे कि जिला समिति में उनके समर्थकों को ज्यादा जगह मिले.  जबकि प्रदेश के सहयोग से मजबूत हुआ एक गुट  चाहेगा कि जिला समिति में उसके समर्थकों को अधिक जगह मिले.  

    नेताओं में कड़वाहट धनबाद महानगर में अधिक दिखेगा 

     यह बवाल धनबाद महानगर में अधिक दिखेगा.  जानकार बताते हैं कि धनबाद विधानसभा, झरिया विधानसभा और बाघमारा विधानसभा धनबाद महानगर में आते हैं.  तीनों जगह से फिलहाल भाजपा से विधायक हैं.  धनबाद महानगर अध्यक्ष के चुनाव में नेताओं में टकराहट दिखी थी.  लेकिन श्रवण राय महानगर के अध्यक्ष बना दिए गए.  इसके लिए कहा तो यह भी जा रहा है कि एक "मजबूत हाथ" के सात  समर्थकों की सक्रिय सदस्यता होल्ड पर रख दी गई और उसके बाद ही श्रवण राय महानगर भाजपा के अध्यक्ष बन सके.  यह कड़वाहट अभी खत्म नहीं हुई है.  कड़वाहट बढ़ती जा रही है.  धनबाद में भाजपा के नेता एक दूसरे को "कट् टू  साइज" करने में लगे हुए हैं और इसी का परिणाम हुआ कि नगर निगम चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार चौथे नंबर पर चला गया.  आश्चर्य की बात है कि अभी तक इसकी कोई समीक्षा नहीं हुई है. 
     
    भाजपा का गढ़ माने जाने वाले धनबाद में भाजपा को संकट 
     
    भाजपा का गढ़ माने जाने वाले धनबाद में भाजपा की  दुर्गति हुई,लेकिन सब चुप.  चिरकुंडा नगर परिषद में भी वही हुआ.  भाजपा के बागी से ही धनबाद में मेयर बन गए और चिरकुंडा में नगर परिषद अध्यक्ष बन गई.  फिर भी समीक्षा नहीं हुई, आखिर किन-किन लोगों ने निगम चुनाव में संजीव अग्रवाल का नाम प्रस्तावित किया था और सहमति दी थी.  इसका भी खुलासा अभी नहीं हुआ है.  इस तरह चिरकुंडा में भी कोई खुलासा नहीं हुआ .  कहा जाता है कि धनबाद जिले के बगल के एक हारे हुए भाजपा नेता  के "वीटो" पावर के चलते चिरकुंडा नगर परिषद में उम्मीदवार बदला  गया.  नतीजा हुआ कि वहां भाजपा समर्थित उम्मीदवार की करारी हार हुई.  खैर यह  तो बातें बीत गई है, लेकिन अब धनबाद ग्रामीण और महानगर जिला कमेटी के गठन को लेकर "प्रेशर पॉलिटिक्स "जोर  पकड़ेगा, नेता एक दूसरे को पीछे छोड़ने की कोशिश करेंगे।  यह अलग बात है कि भाजपा ग्रामीण में टुंडी, सिंदरी और निरसा  विधानसभा क्षेत्र आते है.  फिलहाल वहां से भाजपा का  कोई विधायक नहीं है.  वहां तो खींचतान  कम दिखेगी, लेकिन महानगर में आर -पार की लड़ाई होगी।  वैसे भी, मेयर चुनाव में भाजपा की हार से पार्टी "बैक फुट" पर है और अगर महानगर अध्यक्ष के चुनाव में भी खेमेबाजी हुई तो आगे क्या होगा, यह देखने वाली बात होगी.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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