झारखंड में संचालित कोल कंपनियां आखिर क्यों  हैं  दबाव में ! क्या होगा असर

    झारखंड में बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल जैसी कोयला कंपनियां दबाव में हैं. कोयले का स्टॉक 42 मिलियन टन से अधिक हो गया है, जबकि डिस्पैच घट रहा है. इससे धनबाद सहित कई क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है.

    झारखंड में संचालित कोल कंपनियां आखिर क्यों  हैं  दबाव में !  क्या होगा असर

    धनबाद (DHANBAD): झारखंड में संचालित कोयला कंपनियां  दबाव में हैं. इसका असर कई इलाकों के आर्थिक सेहत पर भी पड़ सकता है. झारखंड में मुख्य रूप से बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल  की खदान संचालित हैं. लेकिन यह कंपनियां एक साथ कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं. परेशानी है कि कोयले का स्टॉक बढ़ रहा है, डिस्पैच घट रहा है. जानकारी के अनुसार बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल के पास कुल मिलाकर फिलहाल 42 मिलियन टन से अधिक कोयले का स्टॉक हो गया है. कंपनियां डिस्पैच नहीं कर पा रही हैं.  

    110 रैक की जगह जा रहा 83 रैक कोयला 

    जहां प्रतिदिन तीनों कंपनियों को लगभग 110 रैक  कोयला भेजने का टारगेट है, वही यह डिस्पैच 83 रैक  के आसपास ही हो पा रहा है.  किसी भी कंपनी का डिस्पैच ग्रोथ नेगेटिव  होना सेहत पर बड़ा असर डालता है.  कारण तो कई गिनाये  जाते हैं.  कहा जाता है कि कैपटिव खदानों के बढ़ते उत्पादन और गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के विस्तार से कोयले की मांग पर असर पड़ा है.  वर्तमान स्थिति पर गौर करें तो लगभग 200 मिलियन टन  से अधिक कोयला कैपटिव खदानों से हो रहा है और सरकारी कोयला कंपनियों  के कोयले का डिमांड घटना एक महत्वपूर्ण कारण है.  साथ ही  सौर और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों के बढ़ते उपयोग ने भी कोयले की जरूरत को कम कर दिया है. 

    कोयला कंपनियां अब नियम बदलने को अग्रसर 
     
    यह अलग बात है कि कोयला कंपनियां  अब अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कई तरह के बदलाव की ओर मुड़ चुकी हैं.  झारखंड में संचालित कोल इंडिया की सबसे मजबूत इकाई बीसीसीएल कोयला बिक्री बढ़ाने के लिए कैशबैक पॉलिसी लेकर आई है.  यह  कैशबैक पॉलिसी ग्राहकों को तो पसंद आ रही है, लेकिन कोयले का डिस्पैच नहीं बढ़ रहा है.  एक समय था जब धनबाद में संचालित बीसीसीएल कंपनी बीआईएफआर  में थी.  उस समय धनबाद को भी आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा था.  कंपनी जब मुनाफे में आई, तो लोगों का  भरोसा बढ़ा  कि अब कोयलांचल  की आर्थिक सेहत में सुधर होगा।  लेकिन फिर एक बार संकट के बादल मंडराते   दिख रहे हैं.  कोयलनाचल  में तो कोयला चोरी भी एक बड़ी बीमारी है.  कोयला चोरी रोकने के जितने भी उपाय किए जाते हैं, सब धराशाई हो जाते हैं.  नतीजा है कि लोकल उद्योग भी बीसीसीएल से कोयला लेने से परहेज करने लगे हैं. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो


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