5100 कलशों के साथ निकाली गई ऐतिहासिक यात्रा, साहिबगंज में दिखा आस्था का संगम

    शहर में आस्था,परंपरा और सामूहिक सहभागिता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला जब 5100 कलशों के साथ निकली भव्य कलश यात्रा ने पूरे साहिबगंज को भक्ति मय बना दिया. काटरगंज में आयोजित 9 दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के शुभारंभ पर यह विशाल आयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े. इस यात्रा की सबसे खास बात महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी रही. हजारों महिलाएं सिर पर कलश लेकर पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुई.

    5100 कलशों के साथ निकाली गई ऐतिहासिक यात्रा, साहिबगंज में दिखा आस्था का संगम

    साहिबगंज (SAHIBGANJ) : शहर में आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का अनोखा संगम साहिबगंज में देखने को मिला है. इलाके में 5100 कलशों के साथ निकली भव्य कलश यात्रा ने पूरे साहिबगंज को भक्ति मय बना दिया. काटरगंज में आयोजित 9 दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के शुभारंभ पर यह विशाल आयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े. इस यात्रा की सबसे खास बात महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी रही. हजारों महिलाएं सिर पर कलश लेकर पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुई.

    सांस्कृतिक परंपराओं की झलक पेश

    जिससे पूरा वातावरण भक्ति और संस्कृति के रंग में रंग गया. घोड़े,बैंड-बाजे और धार्मिक जयघोष के बीच निकली यह यात्रा शहर की सड़कों पर आस्था का जनसैलाब बन गई. काटरगंज से शुरू होकर यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए करीब 5 किलोमीटर दूर मुकेतेश्वर धाम गंगा घाट पहुंची जहां वैदिक रीति-रिवाजों के साथ गंगाजल भरा गया. इसके बाद श्रद्धालु पुनःयज्ञ स्थल लौटे जहां यात्रा का समापन हुआ. आयोजन के दौरान पूरा शहर मानो एक सूत्र में बंधा नजर आया. जगह-जगह लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया और भक्ति गीतों से माहौल गुंजायमान रहा. इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक भी पेश की.

    एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा

    कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष विमल यादव और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री बजरंगी प्रसाद यादव भी शामिल हुए. प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे जबकि समिति के सैकड़ों कार्यकर्ता व्यवस्था संभालने में जुटे रहे. आने वाले 9 दिनों तक चलने वाले इस महायज्ञ को लेकर शहरवासियों में खासा उत्साह है. यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि समाज को जोड़ने और परंपराओं को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम भी बनकर उभरा है.

    रिपोर्ट – गोविंद ठाकुर


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