बंगाल चुनाव के पहले सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ क्यों खुलने जा रही है "फाइल", रेल मंत्री रहते क्या लगे हैं आरोप


धनबाद(DHANBAD): बंगाल चुनाव के पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ जांच की एक फाइल खुलने जा रही है. यह अलग बात है कि यह फाइल उस समय की है, जब 2010 में ममता बनर्जी केंद्रीय रेल मंत्री थी. 15 साल के बाद यह फाइल एक बार फिर चर्चे में है. दरअसल, ममता बनर्जी के रेल मंत्री कार्यकाल के दौरान लागू की गई रेलवे कैटरिंग नीति पर विवाद छिड़ गया है. आरोप है कि उस समय रेलवे के खानपान स्टॉल और कैंटीन के संचालन की ठेकेदारी से जुड़ी आईआरसीटीसी की टेंडर प्रक्रिया में बदलाव कर एक विशेष समुदाय को फायदा पहुंचाया गया था. लगभग डेढ़ दशक के बाद कथित आरक्षण प्रावधान को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक हलके में एक नई बहस छेड़ दी है.
लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी नामक एक कार्यकर्ता ग्रुप ने शिकायत दर्ज कराई है. कहा गया है कि यह आरक्षण तुष्टिकरण की नीति के तहत किया गया. साथ ही आरोप लगाया गया है कि इस फैसले के कारण एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के अधिकारों में कटौती हुई. इस शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है. आयोग ने रेलवे बोर्ड से इस पूरे मामले की जांच करने और उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिया है.
दरअसल, वर्ष 2009-10 के रेल बजट भाषण के दौरान तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बेहतर गुणवत्ता का भोजन, साफ पीने का पानी, स्वच्छ शौचालय और सफाई सुनिश्चित करने की घोषणा की थी. कहा था कि जन आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी और राष्ट्रीय और क्षेत्रीय व्यंजनों को रेलवे कैटरिंग में शामिल किया जाएगा. इसी घोषणा के आधार पर रेलवे बोर्ड द्वारा 21 जुलाई 2010 को नई कैटरिंग नीति लागू की गई थी.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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