भगवान भरोसे है राजधानी रांची, नागरिक अपनी सुरक्षा खुद करें, पुलिस अभी दूसरे कामों में व्यस्त है
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रांची(RANCHI): किसी भी राज्य की राजधानी सबसे सेफ और सुरक्षित मानी जाती है. कहा जाता है कि राजधानी में हर तरफ खुशहाली रहती है. लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में ऐसा नहीं है. हा यहां सुरक्षा बड़े साहब और हुक्मरानों के लिए. लेकिन जिनके टैक्स के पैसे से साहब को सैलरी मिलती है और हाकिम माननीय बनते है. वह भगवान भरोसे है.शायद नेता जी भी इसे हर भाषण में दोहराते है,लेकिन जनता समझ नहीं पाई. नेता जी कहते है जनता भगवान है.ऐसे में भगवान को सुरक्षा की क्या जरूरत है. अब बात सीधे सीधे करते है. हाल के दिनों में अपराधी,चोर,लूटेरे-तस्कर शहर में खुलेआम घूम रहे है. लेकिन पुलिस सो रही है.चलिए पूरी कहानी बताते है.
सबसे पहले बात रांची के धुर्वा इलाके की कर लेते है. यहां मौशीबाड़ी के पास से दो बच्चे लापता हो गए. अंश और अंशिका दोनों भाई बहन घर से बिस्किट लेने के लिए निकले थे. अब 6 दिन बीत गया लेकिन घर वापस नहीं लौटे. दोनों की उम्र 5-7 साल के बीच है. बच्चे के परिजन माँ बाप साप परेशान है. माँ की चीख सुनकर पूरा इलाका रो पड़ा. पुलिस भी पहुंची लेकिन अब तक बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला. बच्चे लापता ऐसे जगह से हुए जहां से कुछ दूरी पर मुख्यमंत्री से लेकर सभी माननीय और अधिकारी का कार्यालय है. झारखंड के 12 मंत्री और 50 से अधिक विधायकों का आवास उसी जगह पर है. लेकिन बच्चे दिन के उजाले में गायब हो गए.
घटना शुक्रवार की है. जब 2 जनवरी शाम पाँच बजे के बाद बच्चे वापस ही नहीं लौटे. वह कहां गए किस हाल में है. कोई जानकारी नहीं है. पुलिस बस दावा कर रही है. जल्द बरामद कर लेंगे लेकिन अब माँ के आँशु भी सुख गए. और पिता की सिसकिया नहीं निकल रही है. बस हर दिन इंतजार में उनका दिन कट रहा है. हर फोन कॉल पर उन्हे लगता है कि शायद उनके बच्चे की कोई जानकारी मिली हो.
अब दूसरी घटना की बात करते है. 06 जनवरी की रात लगभग 1:00 बजे दैनिक जागरण Inext के दो मीडिया कर्मी पर जानलेवा हमला हुआ. वह कार्यालय से घर जा रहे थे.इसी बीच कोकर सुभाष चौक के पास पहुंचते ही बाइक सवार दो अपराधियों ने छिनतई के इरादे से उन पर जानलेवा हमला कर दिया. अचानक हुई इस वारदात से कुछ समय के लिए इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
इसी दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने साहस, सतर्कता और एकजुटता का परिचय देते हुए दोनों आरोपियों का पीछा किया और उन्हें खदेड़ कर पकड़ लिया. लेकिन पुलिस गायब दिखी. कही भी पुलिस की कोई PCR को जानकारी तक नहीं मिली. कुछ लोगों ने जब जानकारी दी तो इसपर जवाब मिला पैदल क्यों जाते है.
अब तीसरी घटना नामकुम की है. जब एक जनवरी की रात अपराधियों ने एक अखबार के सीनियर पत्रकार के घर के बाहर अपराधियों ने हथियार लहराया. गाली गलौज किया. पूरी घटना CCTV में कैद हो गई. पत्रकार को जान से मारने की धमकी दी गई. लेकिन पुलिस नदारत दिखी.
चौथी घटना रांची के लालपुर थाना क्षेत्र के एक बार से सामने आई. चार जनवरी को जब मामूली सी नोंक झोंक में एक युवक पर बदमाशों ने कार चढ़ा दिया. युवक गढ़वा का रहने वाला था. इस घटना में भी युवक की जान चली गई. स्थानीय लोगों के मुताबिक 10 से 15 मिनट तक पहले दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ. फिर अचानक घटना को अंजाम दे दिया गया. तब तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची. जबकि लालपुर इलाका भीड़ भाड़ वाला क्षेत्र है.
अब पाँचवी घटना एक जनवारी की जब पुलिस सबसे ज्यादा अलर्ट होने का दावा भर रही थी. तभी बिरसा चौक स्तिथ एक पेट्रोल पंप पर तेल भरवाने के दौरान हुए विवाद में कार सवार ने एक युवक को कार से रौंद दिया. इस घटना में उसकी जान चली गई.
हां अब बात पुलिस की कर लेते है. ऐसे पुलिस फिल्मों में घटना के बाद पहुंच कर माहौल बनाती है. कुछ ऐसा ही रांची पुलिस का भी कारनामा है. ज्यादातर घटनाओं में पुलिस गिरफ़्तारी जरूर करती है. फिर प्रेस वार्ता कर खुद की उपलब्धि का बखान किया जाता है. लेकिन जिस तरह से अपराधी चोर लूटेरे सक्रिय है. इससे यही लगता है कि अपराधियों में डर खत्म हो गया है.
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