विधायक प्रदीप यादव को कांग्रेस विधायक दल का नेता और मथुरा बाबू को मुख्य सचेतक बनाने के पीछे क्या रही वजह, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    विधायक प्रदीप यादव को कांग्रेस विधायक दल का नेता और मथुरा बाबू को मुख्य सचेतक बनाने के पीछे क्या रही वजह, पढ़िए इस रिपोर्ट में

    Jharkhand Politics: झारखंड में ओबीसी कोटे से मंत्री नहीं बनाए जाने को लेकर कांग्रेस की किरकिरी हो रही थी. हालांकि कांग्रेस का कहना था कि विधानसभा चुनाव में ओबीसी कोटे को अधिक टिकट दिया गया था. लेकिन जीतकर केवल दो ही आए. और मंत्री सिर्फ चार ही बनाना था, इसलिए ओबीसी कोटे को मंत्री नहीं बनाया गया. लेकिन विधायक प्रदीप यादव को विधायक दल का नेता बनाकर इन आरोपों से बचने की कोशिश कांग्रेस ने की है. प्रदीप यादव भी मंत्री पद के प्रबल दावेदार थे. लेकिन संथाल परगना से कांग्रेस कोटे के दो मंत्री बन गए. डॉक्टर इरफान अंसारी और दीपिका पांडे सिंह .शायद यही वजह रही है कि प्रदीप यादव को कांग्रेस विधायक दल का नेता मनोनीत किया गया है.

    मथुरा प्रसाद महतो को क्यों बनाया गया मुख्य सचेतक

    राजेश कच्छप को उप नेता मनोनीत किया गया है. कांग्रेस ने मुख्य सचेतक के लिए अनूप सिंह का नाम प्रस्तावित किया गया है. इधर झामुमो के वरीय नेता और टुंडी के विधायक मथुरा महतो को भी झामुमो कोटे से मंत्री पद नहीं मिला. मंत्री की रेस में वह आगे आगे चल रहे थे. लेकिन योगेंद्र महतो मंत्री बन गए. इधर, मथुरा महतो के विधानसभा टुंडी के बगल के गिरिडीह के विधायक भी नगर विकास मंत्री बन गए. ऐसे में झामुमो ने मथुरा प्रसाद महतो को मुख्य सचेतक बनाया है.

    झारखंड के छठी विधानसभा का सत्र गुरुवार को समाप्त हो गया. राज्यपाल के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड देश का सबसे पिछड़ा राज्य है. यहां सबसे अधिक आदिवासी, दलित, पिछड़ा ,मजदूर और किसान रहते हैं. यहां टाटा ,बिरला जैसे कई उद्योग लगे. राज्य में टाटा जैसी कंपनी है. बावजूद यहां के लोग भूमिहीन, विस्थापित, बेरोजगार हैं. पलायन कर रहे हैं .यह समझ में नहीं आता कि राज्य को कौन सा अभिशाप लगा है. यह गंभीर विषय है. इसी पीड़ा को लेकर शिबू सोरेन, निर्मल महतो जैसे लोगों ने अलग राज्य की परिकल्पना की. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य बिल्कुल साफ है. सभी के सपने को पूरा करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष के लोग कहते हैं कि अटल बिहारी वाजपेई ने झारखंड के अलग राज्य बनने पर मोहर लगाई .यह सही है. वह प्रधानमंत्री थे, लेकिन गरीब को उनके दरवाजे पर जाकर कोई अधिकार नहीं दिया है. इसके लिए वर्षों लड़ाई लड़ी गई और असंभव को संभव कर दिखाया गया. इस पीड़ा को हम लोगों से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता. हमारा लक्ष्य साफ है .हर वर्ग के सपनों को पूरा करेंगे. यह मंत्रालय से नहीं, गांव, देहात से चलने वाली सरकार है .जब तक यहां के आदिवासी आगे नहीं बढ़ेंगे. तब तक राज्य को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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