दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं पहुंची विकास की किरण, गुणवत्ता पर उठा सवाल

    दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं पहुंची विकास की किरण, गुणवत्ता पर उठा सवाल

    गुमला : झारखंड में आए दिनों इस बात पर चर्चा होती है कि झारखंड बने हुए 25 साल से अधिक का समय हो गया बावजूद इसके आज भी दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की किरण नहीं पहुंच पाई है. इसके लिए कई कारण माने जा सकते हैं लेकिन एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि झारखंड में विकास योजनाओं का काम करने वाली एजेंसी विकास योजनाओं की गुणवत्ता को लेकर कभी भी गंभीर नजर नहीं आती है.

    7.30 करोड़ की लागत से कराया जा रहा था निर्माण

    यही कारण है कि विकास योजनाएं तो सही रूप से बन नहीं पाती है और अगर बनती भी है तो उसकी गुणवत्ता इतनी घटिया होती है कि वह काफी समय तक चल नहीं पाती है ऐसा ही एक मामला गुमला जिला में सामने आया है. ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के माध्यम से गुमला जिला के चैनपुर प्रखंड के टाटी नवागाई नदी पर 7:30 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण कराया जा रहा था.

    नए सिरे से बनाने का निर्देश  

    पुल के निर्माण कार्य का पूरा होने का समय आ गया लेकिन उसके एक हिस्से में गुणवत्ता सही नहीं होने के कारण ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के अभियंता द्वारा उसे तोड़कर नए सिरे से बनाने का निर्देश दिया गया है ऐसे में आप समझ सकते हैं कि झारखंड में विकास योजनाओं की गुणवत्ता को लेकर कितने गंभीरता से काम की जा रही है. एक तो इन इलाकों में विकास नहीं हो पता है और विकास हो भी रहा है तो उसमें गुणवत्ता का जो अभाव देखने को मिलता है वह निश्चित रूप से काफी चिंता का विषय बना हुआ है.


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