शिव भक्ति का दिखा अद्भुत समागम, शरीर में 151 आलपीन, जीभ में त्रिशूल के साथ भक्तों ने की आराधना

    शिव भक्ति का दिखा अद्भुत समागम, शरीर में 151 आलपीन, जीभ में त्रिशूल के साथ भक्तों ने की आराधना

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले का चाकुलिया प्रखंड मंगलवार को आस्था और परंपरा का अनोखा केंद्र बना रहा. चकुलिया के सिमदी गांव में आयोजित चड़क पूजा में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. गांव के सिमदेश्वर शिव मंदिर सैकड़ों श्रद्धालु जुटे. यहां भोक्ताओं ने कठिन तप और अद्भुत साहस के जरिए भगवान शिव की आराधना की. पूजा की शुरुआत मंदिर के समीप स्थित तालाब में स्नान के साथ हुई. इसके बाद भोक्ताओं ने तपती धूप में कठिन व्रत निभाते हुए कोई जमीन पर लोटते हुए तो कोई कांटों पर लेटकर मंदिर तक पहुंचे. पूरा माहौल हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा. 

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    आलपीन और कील घोंप दिखाई भक्ति 
    इस दौरान आस्था की चरम सीमा तब देखने को मिली जब कई भोक्ताओं ने अपने शरीर में आलपीन और कील घोंपकर भगवान शिव की आराधना की.भोक्ता गोपाल चंद्र नायक ने अपने शरीर में 151 आलपीन चुभोए, जबकि मनोरंजन नायक ने 108 आलपीन लगाकर भगवान शिव को समर्पण जताया.  कई श्रद्धालुओं ने अपनी जीभ में त्रिशूल और लोहे की कील घोंपकर भी पूजा-अर्चना की, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे. 

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    35 फिट ऊंचाई पर झुला भोक्ता
    चड़क पूजा का सबसे रोमांचक दृश्य तब देखने को मिला जब भोक्ताओं ने अपनी पीठ में हुक जैसी कील फंसाकर करीब 35 फीट ऊंचाई पर झूलते हुए परिक्रमा की. इस अद्भुत अनुष्ठान को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे. पूजा के दौरान जीभ फोड़ और रजनी फोड़ जैसे पारंपरिक अनुष्ठान भी संपन्न हुए. कार्यक्रम के अंत में चड़क पूजा समिति द्वारा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. सिर्फ चाकुलिया ही नहीं बल्कि कोल्हान का कई गांवों में मंगलवार को चड़क पूजा की गई. जहां आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला. 

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