झारखंड में जंगली हाथियों का रास्ता सुरक्षित ! अब गांव में नहीं घुसेंगे गजराज 

    Elephant corridor in jharkhand:राज्य में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब तक राज्य में केवल 17 एलीफेंट कॉरिडोर चिन्हित थे. हालिया सर्वेक्षण के बाद 58 नए कॉरिडोर की पहचान की गई है

    झारखंड में जंगली हाथियों का रास्ता सुरक्षित ! अब गांव में नहीं घुसेंगे गजराज

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): राज्य में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब तक राज्य में केवल 17 एलीफेंट कॉरिडोर चिन्हित थे. हालिया सर्वेक्षण के बाद 58 नए कॉरिडोर की पहचान की गई है. इस तरह राज्य में कुल कॉरिडोर की संख्या बढ़कर 75 हो गई है. यह विस्तृत सर्वेक्षण मुंबई स्थित वाइल्डलाइफ एंड वी प्रोटेक्शन फाउंडेशन की टीम ने करीब डेढ़ साल में पूरा किया. टीम का नेतृत्व फील्ड बायोलॉजिस्ट और रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ इश्तेयाक अहमद पटेल ने किया. उनकी टीम ने विभिन्न जिलों में जाकर गहन अध्ययन किया. सर्वे के दौरान सिंहभूम क्षेत्र में सबसे अधिक चार और हजारीबाग क्षेत्र में तीन नए कॉरिडोर चिन्हित किए गए. फाइनल रिपोर्ट वन विभाग को सौंप दी गई है, जिसके आधार पर अब इन कॉरिडोर को सुरक्षित और सुगम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. वन विभाग का मुख्य उद्देश्य हाथियों के प्राकृतिक आवागमन को निर्बाध बनाना और उन्हें रिहायशी इलाकों में जाने से रोकना है. इसी क्रम में वनरक्षियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. वनकर्मियों को कॉरिडोर प्रबंधन, सुरक्षा उपाय और हाथियों के अनुकूल वातावरण तैयार करने की तकनीक सिखाई गई. 

    कॉरिडोर में लगाए जाएंगे 90 प्रजातियों के पेड़ पौधे

    प्रस्तावित कॉरिडोर करीब तीन किलोमीटर चौड़े होंगे. इसमें हाथियों के लिए भोजन और पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी. कॉरिडोर में करंज, शीशम, कटहल, आम, जामुन समेत लगभग 90 प्रजातियों के पेड़-पौधे लगाए जाएंगे. हाथियों की पसंदीदा घास भी उगाई जाएगी. सुरक्षा के लिए कॉरिडोर को पत्थर और पिलर से घेरा जाएगा. आवश्यकता पड़ने पर आसपास के आबादी क्षेत्रों का पुनर्वास भी किया जाएगा. इस परियोजना को कैंपा योजना के तहत जल्द लागू किया जाएगा, जिससे हाथियों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव-हाथी संघर्ष में भी कमी आने की उम्मीद है. 

    3 किमी चौड़े सुरक्षित मार्ग से घटेगा मानव-हाथी संघर्ष

    सीसीएफ वाइल्ड लाइफ एसआर नटेश ने बताया कि कॉरिडोर को विकसित करने के दौरान आवश्यकतानुसार आबादी को अन्य स्थानों पर शिफ्ट करने का प्रयास किया जाएगा. सभी कॉरिडोर लगभग तीन किलोमीटर चौड़े बनाए जाएंगे.इनमें हाथियों के लिए भोजन व पानी की समुचित व्यवस्था की जाएगी. वहीं, विशेषज्ञ इश्तेयाक अहमद पटेल ने बताया कि राज्य में विस्तृत सर्वेक्षण के बाद कुल 75 हाथी कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं. जिनमें सिंहभूम और हजारीबाग रीजन में सबसे अधिक कॉरिडोर पाए गए हैं. वाइल्डलाइफ एंड वी प्रोटेक्शन फाउंडेशन की टीम ने करीब डेढ़ साल तक अलग-अलग जिलों में अध्ययन कर यह रिपोर्ट तैयार की.

    राज्य के कई जिले हाथियों से प्रभावित 

    राज्य के कई जिले जंगली हाथियों के उत्पात से प्रभावित है. हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां समेत अन्य जिलों में हाथी उत्पात मचा रहे हैं. खेत -घरों को नुकसान पहुंचाने के अलावा हाथियों के हमले में लोगों की मौतें भी हो रही है. हाथी और मानव संघर्ष रुके इसके लिए वन विभाग में हाथियों के कॉरिडोर को सुरक्षित और सुगम बनाने का निर्णय लिया है.

    रिपोर्ट-रोहित सिंह 


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