खेल अभी बाकी है: संजीव सिंह को चुनौती देने के लिए डिप्टी मेयर की कुर्सी को "हथियार" बनाने की ऐसे हो रही कोशिश

    खेल अभी बाकी है:  संजीव सिंह को चुनौती देने के लिए डिप्टी मेयर की कुर्सी को "हथियार" बनाने की ऐसे हो रही कोशिश

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद में निगम चुनाव का परिणाम आने के बाद भी राजनीतिक सरगर्मी   बनी हुई है.  एक तरफ चुनाव परिणाम का विश्लेषण किया जा रहा है, तो दूसरी ओर कौन बनेगा डिप्टी मेयर, इसके लिए भी गणित बैठाये  जा रहे हैं.  सूत्रों पर भरोसा करें तो निगम चुनाव में मुंहकी खाये  कई जनप्रतिनिधि इस प्रयास में हैं कि वह अपने समर्थक को कम से कम डिप्टी मेयर बनवा सकें।  इसके लिए प्रयास भी हो रहे हैं, तो लॉबिंग  भी की जा रही है.  इसमें ऐसे लोगों को कितनी सफलता मिलती है ,यह  पूरी तरह से भविष्य के गर्भ में है और इसका निर्णय 18 मार्च को ही संभव है.  हालांकि मेयर चुनाव जीतने के बाद एक बार फिर धनबाद की राजनीति सिंह मेंशन में सिमट   गई है. 
     
    डिप्टी मेयर बनने के लिए "दरबार" लगने लगे हैं
     
    डिप्टी मेयर बनने के लिए "दरबार" लगने लगे हैं.  डिप्टी मेयर का पद भी कम महत्वपूर्ण नहीं होता है.  इस वजह से कम से कम निगम चुनाव में मेयर में अपने सपोर्टेड प्रत्याशी को नहीं जीता  पाने के दुख को डिप्टी मेयर   बनाकर कुछ हद तक दूर करना चाह रहे हैं.  मतलब साफ है कि जिस तरह मेयर चुनाव की लड़ाई हुई, उससे कम दिलचस्प लड़ाई डिप्टी मेयर के लिए भी नहीं होने जा रही है.  निश्चित रूप से संजीव सिंह चाहेंगे कि उनका समर्थक  ही कोई डिप्टी मेयर बने, जबकि उनका विरोध करने वाले इस कोशिश में है कि डिप्टी मेयर बनाकर वह अपनी लाज को बचा लें. 
     
    रात- दिन  चल रही बैठकें ,बैठाये जा रहे गणित 
     
    रात दिन इसके लिए लॉबिंग  चल रही है.  अब धनबाद की नजर डिप्टी मेयर की कुर्सी पर टिक गई है.  रणनीतिकारों की मदद ली जा रही है.  बैठकों का दौरा शुरू हो गया है.  सूत्र तो यह भी दावा कर रहे हैं कि "शक्ति संतुलन" को बनाए रखने के लिए डिप्टी मेयर की कुर्सी का उपयोग किए जाने की तैयारी चल रही है.  हालांकि इसमें किसको कितनी सफलता मिलेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, सूत्र दावा कर रहे हैं कि संजीव सिंह को चुनौती देने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है.  इस रणनीति में कम से कम वैसे लोग तो पूरी तरह से शामिल है, जो चुनाव में संजीव सिंह का विरोध कर रहे थे.  क्योंकि भाजपा के तीन विधायक और एक सांसद के रहते भाजपा समर्थित उम्मीदवार चौथे नंबर पर चला गया है.  यह बात कम से कम विधायक और सांसद  को नहीं पच रहा है. 

    डिप्टी मेयर की कुर्सी को हथियार बनाने की तैयारी 

     ऐसे में शक्ति संतुलन के लिए डिप्टी मेयर की कुर्सी को हथियार बनाने की तैयारी अंदरखाने  जोर-शोर से चल रही है.  सूत्रों के अनुसार डिप्टी मेयर के लिए कम से कम 30 पार्षदों को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है.  समर्थन जुटाने  के लिए कई संभावनाओं को तलाशा जा रहा है.  बता दें कि नगर निगम के 55 वार्डो से चुने गए पार्षदों के बीच से ही डिप्टी  मेयर का चयन होना है.  किसी भी प्रत्याशी को जीत के लिए कम से कम 28 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है.  डिप्टी मेयर के लिए यही अहम्  आंकड़ा है.  हालांकि 30 या उससे अधिक पार्षदों का समर्थन प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है, जिससे कि  किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हो. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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