25 और 26 सितंबर 1995 का दिन, कोयलांचल याद कर क्यों सिहर उठता है, जानिए वजह 

    25 और 26 सितंबर 1995 का दिन, कोयलांचल याद कर क्यों सिहर उठता है, जानिए वजह 

    धनबाद(DHANBAD): 25 और 26 सितंबर 1995 की रात और दिन को कम से कम कोयलांचल के लोग नहीं भूल सकते. रहने वाले चाहे वह कोलियरी क्षेत्र के हो, शहरी क्षेत्र के या ग्रामीण क्षेत्र के. सभी लोग उस दिन को याद करते हुए सिहर उठते हैं. धनबाद में उस दिन रिकॉर्ड 331 मिलीमीटर वर्षा हुई थी और कोयलांचल में कुल 75 लोगों से अधिक की मौत हो गई थी. कतरास की कतरी नदी रौद्र रूप धारण कर ली थी और नदी का सारा पानी गजाली तांड खदान में घुस गया था. देखते देखते ही 64 श्रमिकों की जल समाधि हो गई थी. इसके अलावा अलग-अलग जगहों पर लोगों की जानें गई. कोयलांचल में उस दिन कोहराम मच गया था. लेकिन 64 श्रमिकों की जो जल समाधि हुई, उनके परिजन आज भी न्याय की आस लगाकर बैठे हैं. उस समय के कोयला मंत्री जगदीश टाइटलर ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बैठाकर  घटना की जांच कराने की बात कही थी. लेकिन यह सब बातें 27 वर्ष बाद भी सिर्फ कागज पर ही हैं. 26 सितंबर को श्रमिकों की समाधि पर परिजन भी पहुंचते हैं. कोयला अधिकारी भी पहुंचते हैं, श्रमिक संगठन के लोग भी जाते हैं और आंसू बहाते हैं. लेकिन परिजनों की सुध लेने का कोई प्रयास नहीं किया जाता.

    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद


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