आखिर भाजपा  क्यों कर रही दलीय आधार पर निकाय चुनाव की मांग, क्या है पार्टी की सोच , पढ़िए विस्तार से !

    आखिर भाजपा  क्यों कर रही दलीय आधार पर निकाय चुनाव की मांग, क्या है पार्टी की सोच , पढ़िए विस्तार से !

    धनबाद(DHANBAD) : झारखंड में पेंडिंग नगर निकाय चुनाव  दलीय आधार पर कराने के लिए पूरे प्रदेश में भाजपा रेस है. मंगलवार को पूरे प्रदेश में इसको लेकर भाजपा की ओर से प्रदर्शन किए गए. राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया गया. आरोप लगाए गए  कि राज्य सरकार जानबूझकर निकाय चुनाव को लटका रही है. यह  बात अलग है कि अभी तक झारखंड में निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हुए है.  पहली बार भाजपा दलीय आधार पर निकाय चुनाव को मुद्दा बनाया है और आंदोलन कर रही है. सवाल उठ रहे  है कि भाजपा आखिर दलीय आधार पर चुनाव क्यों कराना  चाह रही है? इसके पीछे राजनीतिक पंडित यह तर्क दे रहे हैं कि भाजपा को यह उम्मीद है कि अगर झारखंड में निकाय चुनाव दलीय आधार पर हुए, तो भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है. 

    भाजपा को उम्मीद : शहरी मतदाता कर सकते हैं पार्टी को वोट 
     
    शहरी मतदाता भाजपा के पक्ष में मतदान कर सकते हैं और इस वजह से भाजपा को लाभ होगा.  झारखंड में कुल 48 निकाय के चुनाव होने है. बता दे कि पिछले चुनाव में भाजपा को बड़ी सफलता मिली थी.  इधर, विधानसभा चुनाव में झारखंड में भाजपा को करारी हार मिली है. उस हार से भाजपा अभी तक उबर नहीं पाई है.अब भाजपा यह सोच कर चल रही है कि निकाय चुनाव में उसे सफलता मिल सकती है. इस वजह से पार्टी एक बार फिर अपनी खोई प्रतिष्ठा निकाय चुनाव में हासिल कर सकती है और यही वजह है कि भाजपा निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराने  को लेकर आंदोलित है.  ऐसा होगा अथवा नहीं, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना तय है कि निकाय चुनाव अब झारखंड में बहुत जल्द होंगे.

    मार्च तक अगर चुनाव नहीं हुए तो झारखंड को होगा आर्थिक नुकसान 
     
    मार्च तक अगर चुनाव नहीं होता है, तो झारखंड को बड़ा आर्थिक नुकसान भी हो सकता है.  यह बात पर भी सच है कि दलीय आधार पर चुनाव होना पार्टियों  के लिए भी मुश्किल है.  निकाय चुनाव को लेकर उम्मीदवारों की सूची लंबी है.   लगभग सभी दल के लोग चाह  रहे हैं कि वह निकाय चुनाव में अपनी उम्मीदवारी पेश करें.  झारखंड में अभी महागठबंधन की सरकार चल रही है.  इस महागठबंधन में झामुमो , कांग्रेस और राजद  शामिल हैं.  अगर दलीय  आधार पर चुनाव हुए  तो इन दलों से तालमेल बैठाना महागठबंधन के नेताओं को मुश्किल हो सकता है. 

    आंदोलन के पीछे भाजपा की क्या हो सकती है सोच ?
     
    दूसरी ओर भाजपा इस प्रयास में है कि अगर दलीय आधार पर चुनाव होते  है, तो उसे शहरी मतदाताओं का बड़ा समर्थन मिल सकता है और भाजपा अपनी खोई  प्रतिष्ठा पर मलहम लगा सकती है.  वैसे, आगे होगा क्या ,यह कहना फिलहाल कठिन है.  धनबाद की बात अगर की जाए तो निगम चुनाव को लेकर उम्मीदवारों की लंबी सूची है. अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि धनबाद नगर निगम के मेयर का पद आरक्षित होगा अथवा सामान्य कोटि का होगा, लेकिन सामान्य कोटि की सूचना मात्र से ही उम्मीदवार रेस है.  शहर के विभिन्न चौक -चौराहों पर होर्डिंग टंग  गए हैं.  रोज नए-नए उम्मीदवार मैदान में आ रहे है.  कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि निकाय चुनाव को लेकर झारखंड का राजनीतिक तापमान चढ़ा हुआ है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

     



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