रांची(RANCHI): टेंडर घोटाले के जरिए कथित रूप से करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में आरोपी पूर्व मंत्री आलमगीर आलम जमानत याचिका पर भारत का सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई. आज हुई इस सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और बचाव पक्ष की दलीलों को आंशिक रूप से सुना, लेकिन फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया कि वह प्रमुख गवाहों के बयान जल्द दर्ज कराए. इसके लिए अदालत ने चार सप्ताह का समय दिया है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुंदरेश्वर और जस्टिस एन. कोटीश्वर सिंह की पीठ ने की. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि गवाहों के बयान और आगे की प्रगति के आधार पर अगली सुनवाई में स्थिति पर विचार किया जाएगा.
इससे पहले भी झारखंड उच्च न्यायालय ने 11 जुलाई को आलमगीर आलम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
बताया जाता है कि ED ने उन्हें पिछले साल 15 मई 2024 को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं. जांच एजेंसी का आरोप है कि उनके करीबी सहयोगियों, जिनमें उनके आप्त सचिव संजीव कुमार लाल और नौकर जहांगीर आलम शामिल हैं, उनके ठिकानों से करीब 32.30 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे. इसी बरामदगी के आधार पर पूरे मामले ने तूल पकड़ा और कार्रवाई तेज हुई.
फिलहाल, अदालत के इस फैसले के बाद आलमगीर आलम को जमानत के लिए कुछ और समय इंतजार करना होगा, जबकि जांच एजेंसियां मामले को और मजबूत करने में जुटी हैं.
Thenewspost - Jharkhand
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