धनबाद(DHANBAD): शायद धनबाद की किस्मत ही कुछ ऐसी है कि उसे जो भी सहूलियतें मिलती हैं, वह परेशानी का करण बन जाती हैं. झारखंड की पहली धनबाद में बनी आठ लेन सड़क का ही उदाहरण ले लीजिये. आज यह सड़क चर्चा में है. सवाल किये जा रहे हैं कि जिस समय इस सड़क का निर्माण हो रहा था, उस समय "इंजीनियरिंग" कहा थी. डीपीआर बनाने के समय क्या महत्वपूर्ण बातों का ध्यान नहीं रखा गया था. क्या उस समय यह पता नहीं चला कि राइजिंग पाइप आगे चलकर परेशानी का बहुत बड़ा कारण बन सकती है.
उद्घाटन के 24 घंटे के भीतर पहली बार धंसी थी सड़क
आपको याद होगा कि उद्घाटन के ठीक 24 घंटे के भीतर ही यह सड़क धंस गई थी. वह दिन 6 अक्टूबर 2024 का था. फिर यह सड़क 25 अक्टूबर 2024 को झारखंड मोड़ के आगे धंस गई थी. आगे 8 जुलाई 25 को सर्विस लेन पर सड़क धंस गई थी. 11 अगस्त 25 को भूली बस्ती के समीप सड़क पर गोफ बन गया था. 15 सितंबर 25 को राजा तालाब के पास गोफ बना था. बताया गया था कि राइजिंग पाइप फटने से बड़ा गड्ढा बन गया था. 17 मार्च 2026 को झारखंड मोड़ के आगे कासियाटांड़ मोड के समीप सड़क धंस गई, फिर 18 मार्च 2026 को झारखंड मोड़ के आगे सड़क धंसी। यह तो आंकड़े हैं, जो चीख चीख कर बता रहे हैं कि या तो सड़क की इंजीनियरिंग सही नहीं है अथवा निर्माण की गुणवत्ता कमजोर है.
रघुवर दास जब मुख्यमंत्री थे तो काम शुरू हुआ था
बता दें कि उस समय झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास थे. 2017 में 8 लेन सड़क का निर्माण शुरू किया गया. लगभग 461 करोड़ की लागत से 20 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया है. सड़क निर्माण का काम दो एजेंसियों ने मिलकर किया. जानकारी के अनुसार गोल बिल्डिंग से विनोद बिहारी चौक तक सड़क निर्माण एक कंपनी ने की, वही विनोद बिहारी चौक से लेकर कतरास के कांको मोड तक सड़क का निर्माण दूसरी कंपनी ने की है. यह सड़क लगभग 7 साल में बनकर तैयार हुई.
एक बार तो निर्माण कार्य को भी रोक दिया गया था
बात इतनी ही नहीं हुई, एक समय तो ऐसा आया जब सड़क को गैर जरूरी बता कर निर्माण कार्य को रोक दिया गया था. इस सड़क का उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 4 अक्टूबर को किया था. बताया जाता है कि सड़क जितनी बार धंसी है ,वह पानी की पाइपलाइन की वजह से धंसी है. सड़क निर्माण के दौरान सर्विस लेन के नीचे ही पाइप लाइन बिछा दी गई है. अब यह पाइपलाइन सड़क धंसने की वजह बन रही है. सवाल डीपीआर बनाने वाली कंपनी से शुरू होता है, उसके बाद इंजीनियरों पर आता है. क्या उन्हें नहीं मालूम था कि पाइपलाइन में जब भी लीकेज होगा, सड़क पर खतरा पैदा हो सकता है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
Thenewspost - Jharkhand
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