रांची (RANCHI): मॉनिटर लिजार्ड की अवैध तस्करी मामले में गिरफ्तार भाजपा नेता राजीव रंजन मिश्रा समेत तीन आरोपियों को अदालत से बड़ी राहत मिली है. एसीजेएम रवि नारायण की अदालत ने सुनवाई के बाद राजीव रंजन मिश्रा, उनके बेटे अविनाश रंजन और सह-आरोपी अरुण राम की जमानत याचिका मंजूर कर ली. तीनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में बंद थे.
यह मामला 14 मई को तब समय सामने आया था, जब वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) और वन विभाग की संयुक्त टीम ने राजधानी के डेली मार्केट स्थित एक होटल में छापेमारी की थी. कार्रवाई के दौरान टीम ने वहां से तीन मृत मॉनिटर लिजार्ड बरामद किए थे. वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मॉनिटर लिजार्ड संरक्षित प्रजातियों में शामिल है और इसकी खरीद-बिक्री या तस्करी गंभीर अपराध माना जाता है.
छापेमारी के बाद जांच एजेंसियों ने मौके से भाजपा नेता राजीव रंजन मिश्रा, उनके पुत्र अविनाश आनंद और अरुण राम को हिरासत में लिया था. पूछताछ के बाद तीनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी काफी चर्चा शुरू हो गई थी.
मामले में गिरफ्तार भाजपा नेता राजीव रंजन मिश्रा ने 18 मई को अदालत में जमानत याचिका दायर की थी. इसके बाद अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों को राहत देने की मांग की, जबकि मामले की गंभीरता को लेकर अभियोजन पक्ष ने अपना पक्ष रखा. सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत देने का फैसला सुनाया.
हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और वन विभाग व वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटे हुए हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मृत मॉनिटर लिजार्ड कहां से लाए गए थे और इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है या नहीं. इस मामले ने एक बार फिर वन्यजीव तस्करी और संरक्षित जीवों की अवैध खरीद-बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

