Politics:निर्वाचित मेयर संजीव सिंह क्या कोई धमका करने वाले हैं, क्यों Either Side से हो रहा पहल का इंतजार

    Politics:निर्वाचित मेयर संजीव सिंह क्या कोई धमका करने वाले हैं, क्यों Either Side से हो रहा पहल का इंतजार
    धनबाद भाजपा में क्या कुछ बड़ा होने वाला है अथवा भाजपा को नवनिर्वाचित मेयर  संजीव सिंह से तालमेल बैठाने में कुछ वक्त लगेगा?

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद भाजपा में क्या कुछ बड़ा होने वाला है अथवा भाजपा को नवनिर्वाचित मेयर  संजीव सिंह से तालमेल बैठाने में कुछ वक्त लगेगा? यह सवाल भाजपा सर्कल में घूम रहा है.  इसका जवाब अधिकृत तौर पर, न पार्टी की ओर से और न हीं संजीव सिंह की ओर से आ रहा है.  हो सकता है कि संजीव सिंह पार्टी की ओर से पहल का इंतजार कर रहे हो और पार्टी संजीव सिंह की ओर से पहल के इंतजार में बैठी हो.  दरअसल, यह सवाल इसलिए भी बड़ा हो गया है कि रांची में रविवार को भाजपा की ओर से निकाय चुनाव में जीते पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को सम्मानित किया गया.  राज्य भर से भाजपा समर्थित विजई  कार्यक्रम में पहुंचे थे.  इस कार्यक्रम से हजारीबाग और धनबाद से निर्वाचित मेयर नहीं पहुंचे थे. 

    भाजपा के कार्यक्रम में धनबाद -रांची के मेयर नहीं पहुंचे थे 
     
    सूत्र तो यह भी दावा कर रहे हैं कि पार्टी की ओर से बागियों  को भी आमंत्रित किया गया था, हालांकि इसकी अधिकृत पुष्टि नहीं हो रही है.  रांची के कार्यक्रम में झारखंड प्रभारी अरुण सिंह, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा, प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू सहित प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता मौजूद थे.  यह बात तो दिखने लगी है कि संजीव सिंह के मामले में भाजपा का रुख  नरम है.  विधायक राज सिन्हा  का परिणाम घोषित होने के दूसरे दिन ही सिंह मेंशन जाकर बधाई देना इसका मजबूत संकेत माना जा रहा है.  बागियों  को भाजपा की ओर से, जो नोटिस दिए गए थे, उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है.  वह अभी ठंडा बस्ते  में चला गया दिख रहा है.  यह  अलग बात है कि चुनाव जीतने के बाद संजीव सिंह भी भाजपा के संबंध में चुपी  बनाए हुए हैं, तो भाजपा भी कुछ नहीं कह रही है.  दरअसल, धनबाद मेयर चुनाव में सारे "इक्वेशन और कैलकुलेशन" भाजपा के बिगड़ गए.  

    शेखर अग्रवाल को " कट टू  साइज"  करने का प्रयास हुआ 

    भाजपा ने संजीव कुमार को अपना समर्थित उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन वह चार नंबर पर चले गए.  संजीव सिंह बागी बनाकर चुनाव मैदान में उतरे और उन्होंने फतह हासिल कर ली.  इसके पहले शेखर अग्रवाल को " कट टू  साइज"  करने का प्रयास हुआ, तो वह भाजपा से ही मुंह मोड़कर झामुमो  के पास चले गए और झामुमो ने उन्हें अपना समर्थित उम्मीदवार बनाया।  वह दूसरे नंबर पर रहे, तीसरे नंबर पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रहा जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार चौथे नंबर पर पहुंच गया.  यह  अलग बात है कि संजीव सिंह को भी चुनाव से हटाने की कोशिश हुई.  यह  कोशिश कई स्तरों पर हुई.  संजीव सिंह की पत्नी विधायक रागिनी सिंह चुनाव से लेकर चुनाव परिणाम तक पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखा. 

    संजीव सिंह भाजपा समर्थित उम्मीदवार को पछाड़ दिए हैं 
     
    सूत्र बताते हैं कि ऐसा करने का उन्हें पार्टी का निर्देश था, बावजूद धनबाद मेयर के चुनाव में संजीव सिंह भाजपा समर्थित उम्मीदवार को पछाड़कर भारी मतों से चुनाव जीत गए.  संजीव सिंह के खिलाफ भाजपा के नेता खासकर सांसद ढुल्लू महतो  कई तीखी  टिप्पणियां की.  ब्लड प्रेशर से लेकर पागल की दवा तक की बात की गई.  लेकिन इन सबसे बेखबर संजीव सिंह चुनाव प्रचार में जुटे रहे और समर्थकों को एकजुट करते रहे.  परिणाम हुआ कि संजीव सिंह भारी मतों से चुनाव जीत गए.  फिलहाल की जो स्थिति है, उसमें ऐसा लग रहा है कि पार्टी और संजीव सिंह की ओर से कौन पहले पहल करता है, इसका इंतजार किया जा रहा है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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