पहली बार काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बाहर मनायी गयी मदन मोहन मालवीय की जयंती,  देवघर में देशभर के कई शिक्षाविद और कवि हुए शामिल

    पहली बार काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बाहर मनायी गयी मदन मोहन मालवीय की जयंती,  देवघर में देशभर के कई शिक्षाविद और कवि हुए शामिल

    देवघर(DEOGHAR):भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय का आज 162 वीं जयंती है.प्रत्येक वर्ष उनकी जयंती काशी हिंदी विश्वविद्यालय जिसे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय भी कहा जाता है वहां एक सप्ताह तक जयंती समारोह आयोजित किया जाता है.शिक्षा के क्षेत्र में सर्व विद्या की पढ़ाई सुनिश्चित हो इसके लिए मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की थी, जो आज के समय में यह विश्वविद्यालय देश दुनिया मे अमिट छाप छोड़े हुए हैं.पहली बार ऐसा हुआ है कि महामना परिवार द्वारा काशी हिंदू विश्वविद्यालय में जयंती समारोह न आयोजित कर देश के अन्य राज्यों में भी मानने का निर्णय लिया,इसी के तहत पहली बार झारखंड के देवघर में मनाई गयी.

    देश के नामीगिरामी शिक्षाविद शिक्षक,बहुभाषी साहित्यकार औऱ कवि हुए शामिल

    शिक्षा के प्रति समाज में जागरूकता लाने के उद्देश्य से भारत रत्न पंडित मोहन मदन मोहन मालवीय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. यही कारण है कि उनकी जयंती पर सप्ताह भर का आयोजन बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में होता है.यह पहला मौका है कि इनकी जयंती समारोह झारखंड के देवघर में आयोजित हुई.जहां झारखंड के 24 में से 18 जिले के महामना परिवार के लोग शामिल हुए.देवघर के एक निजी होटल में जयंती समारोह सह पुरातन छात्र समागम और बहुभाषी सम्मेलन का आयोजन किया गया.

    साहित्यकार और शिक्षकों द्वारा मदन मोहन मालवीय के जीवन पर प्रकाश डाला गया

    इस सम्मेलन में जेएनयू के पूर्व संकाय प्रमुख,डीएवी कॉलेज देहरादून के प्रोफेसर देश के नामचीन कॉलेजों के शिक्षक के साहित्यकार और शिक्षकों द्वारा मदन मोहन मालवीय के जीवन पर प्रकाश डाला और लोगों को उनके द्वारा किए गए शिक्षा के प्रति कार्य को समाज में जागरूकता लाने का आग्रह किया.इस अवसर पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र बड़ी संख्या में भी मौजूद रहे.

    रिपोर्ट-रितुराज सिन्हा


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