कोयलांचल में कोयले की तरह लॉटरी गिरोह पर भी बरसती है लक्ष्मी, जानिए क्या है गणित 

    कोयलांचल में कोयले की तरह लॉटरी गिरोह पर भी बरसती है लक्ष्मी, जानिए क्या है गणित 

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड अभी तक तो मिनरल्स के अवैध उत्खनन को लेकर ही चर्चे में था. लेकिन अब अवैध लॉटरी टिकट के धंधे को लेकर भी सुर्खियां बटोरने लगा है. साहिबगंज में बरामद 36 करोड़ की लॉटरी का टिकट इसका एक उदाहरण मात्र है. यह धंधा झारखंड के 24 जिलों में कमोबेश चल रहा है, ऐसा सूत्र दावा कर रहे हैं. कोयलांचल की बात करें तो यहां भी यह धंधा निर्बाध ढंग से चल रहा है. इस धंधे में लगे गिरोह ताकतवर है, पैसे के बंटवारा करने में माहिर है, सेटिंग जबरदस्त है, इस वजह से उनका धंधा कभी मंदा नहीं होता.

    साहिबगंज पुलिस की उपलब्धि के कई मायने  

    कोयले के अवैध खनन में लगे गिरोहों की तरह लॉटरी टिकट बेचकर लोगों को ठगने वाला गिरोह भी अपने को किसी से कम नहीं आंकता. साहिबगंज में पुलिस ने 36 करोड़ का लॉटरी टिकट बरामद किया है. यह टिकट 29 पैकेट में रखा हुआ था. यह साहिबगंज पुलिस के लिए उपलब्धि तो है ही लेकिन यह भी बताने के लिए काफी है कि झारखंड के अन्य जिलों में भी अवैध लॉटरी का धंधा चल रहा है. कोयलांचल की बात करें तो झरिया से लेकर जामाडोबा इलाके में इस धंधे में कुछ लोगों की बादशाहत चलती है. साहिबगंज से बरामद लॉटरी टिकट का धनबाद कनेक्शन है भी या नहीं, यह तो जांच से ही पता चलेगा.

    कोयलांचल से भी हो सकता है कनेक्शन

    लेकिन सूत्रों का कहना है कि कोयलांचल से इसका कनेक्शन जरूर होगा. झरिया से जोड़ापोखर तक के इलाके में गरीब लोगों को जल्द से जल्द करोड़पति बनाने की लालच देकर यह गिरोह धंधा कर रहा है. गिरोह के संचालकों की पैठ पुलिस अधिकारियों तक है. नतीजा है कि उनके धंधे में कभी बाधा नहीं पड़ती. यह लॉटरी टिकट बिहार के मुजफ्फरपुर में छापी जाती है. उसके बाद झारखंड के विभिन्न जिलों में इसका वितरण होता है. धनबाद के गोविंदपुर में इस टिकट का लेन देन बल्क में किया जाता है. वहां से टिकट झरिया और जोरापोखर इलाके में पहुंच जाता है. वैसे जिले के अन्य हिस्सों में भी काम होता है, लेकिन झरिया में डंके की चोट पर और खुलेआम किया जाता है. झरिया और आसपास के इलाके में लॉटरी के टिकटों का लगभग 200 से अधिक काउंटर है. इन कॉउंटरो  पर खूब यह काम होता है. गैंग के लोग विभिन्न गुट में बंधे हुए हैं और एक गुट में 40 से 50 लड़के काम करते हैं. वह या तो काउंटर पर बैठकर टिकट की बिक्री करते हैं अथवा घूम-घूम कर लोगों को अपने जाल में फंसाते है. सिर्फ कोयलांचल में यह धंधा करोड़ों का है.

    रिपोर्ट: शांभवी के साथ संतोष, धनबाद   


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