तीन राज्यों की आस्था का महाकुंभ है कान्हाईश्वर पहाड़ पूजा, जानिए कब सजता है भव्य मेला

    तीन राज्यों की आस्था का महाकुंभ है कान्हाईश्वर पहाड़ पूजा, जानिए कब सजता है भव्य मेला

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले का चाकुलिया प्रखंड सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि राज्य की सबसे बड़ी पहाड़ पूजा के लिए भी पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है. यहां स्थित कान्हाईश्वर पहाड़ पूजा को राज्य का सबसे बड़ा पहाड़ पूजा कहा जाता है. यह पहाड़ आस्था, परंपरा और प्रकृति का ऐसा संगम है, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु अच्छी बारिश, हरियाली और खुशहाली की कामना लेकर पहुंचते हैं. हर साल आषाढ़ महीने के तीसरे शनिवार को कान्हाईश्वर पहाड़ पूजा धूम-धाम से की जाती है. यह पूजा देखने के लिए  सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. यही वजह है कि इसे तीन राज्यों की साझा आस्था का सबसे बड़ा पर्व भी कहा जाता है. चाकुलिया प्रखंड के जयनगर गांव में स्थित कान्हाईश्वर पहाड़ का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम बंगाल में, जबकि 75 प्रतिशत हिस्सा झारखंड में पड़ता है. सदियों पुरानी मान्यता है कि यहां पूजा करने से अच्छी बारिश होती है और इलाके में सुख-समृद्धि बनी रहती है.पूजा के दिन पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूब जाता है. ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक गीत-संगीत और आदिवासी संस्कृति की झलक के बीच हजारों श्रद्धालु पहाड़ पर चढ़कर पूजा-अर्चना करते हैं. 

    विशाल मेला का होता है आयोजन
    पूजा के दिन पहाड़ के नीचे विशाल मेले का आयोजन होता है. यहां ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं की अनोखी तस्वीर देखने को मिलती है. जयनगर, भंडारू, बिहारीपुर, लोहामलिया, दुआरीशोल, जोड़ाम, चालुनिया, दुबराजपुर, बैकुंठपुर समेत 12 मौजा के ग्रामीण मिलकर इस पूजा का आयोजन करते हैं. वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है. कान्हाईश्वर पहाड़ पूजा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है. पूजा के दिन भीड़ इतनी होती है कि सड़क पर 10 किमी तक लंबा काम लग जाता है. 

    इस बार 4 जुलाई को होगी पूजा
    इस साल कान्हाईश्वर पहाड़ की पूजा 4 जुलाई को होगी. कमेटी की ओर से पूजा की तैयारी शुरू कर दी गई है. चाकुलिया प्रखंड पहाड़ पूजा के लिए जाना जाता है. कान्हाईश्वर के अलावा यहां कुल 6 पहाड़ों की पूजा होती है. कान्हाईश्वर के आलावा यहां जमीरा, सातनाला, गोटाशिला, खोड़ीपहाड़ी, घोटिडूबा पहाड़ की पूजा भी धूमधाम से की जाती है. लोग अच्छी बारिश और अच्छी फसल के लिए पहाड़ों की पूजा करते है. पूजा के बाद बारिश नहीं होने पर पहाड़ों की पूजा दोबारा की जाती है. पूजा के दौरान बलि भी दी जाती है. सबसे पहले जमीरा पहाड़ की पूजा होती है.

    गोटाशिला पहाड़ पूजा में भी होती है भीड़
    कान्हाईश्वर पहाड़ पूजा के अलावा गोटाशिला पहाड़ पूजा के दौरान भी आस्था का अनोखा संगम देखने मिलता है. यहां भी तीन राज्यों के श्रद्धालु पूजा के लिए पहुंचते है. हजारों की भीड़ पूजा के लिए पहुंचती है. गोटाशिला पहाड़ माटियाबांधी पंचायत के घाघरा गांव स्थित है. यहां पहाड़ पूजा 7 जुलाई को की जाएगी. पूजा के दिन विशाल मेला का आयोजन किया जाएगा. पहाड़ पर एक छोटा सा झरना है जो कभी नहीं सूखता है. यहां एक शिव मंदिर भी है. मान्यता है कि पहाड़ पूजा के दिन बारिश जरूर होती है. पूजा कमेटी ने पूजा की तैयारी शुरू कर दी है. 



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