टीएनपी डेस्क(TNP DESK):यूपीएससी ने अपने नतीजे घोषित कर दिए सभी तरफ अलग-अलग यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों की बात हो रही है उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी बताई जा रही है.वही आज हम आपको झारखंड के एक ऐसे आईएएस अधिकारी की सफलता की कहानी बताने वाले जिन्होने परिश्रम करके अपने मुकाम को हासिल किया.गरीबी मजबूरी, परिवार की खराब माली हालत सभी को किनारा कर रांची के जिला कलेक्टर मंजूनाथ भजंत्री ने अपने सपने को पूरा किया जिसमे उनके पिता ने उनका भरपुर साथ दिया.रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री आज अपनी अलग पहचान रखते है जनसुनवाई और कार्यशैली के लिए पूरे झारखंड में पहचाने जाते है.
मेहनत और संघर्ष के आगे मुश्किलों ने माना हार
कहा जाता है कि जब आप किसी मुकाम को हासिल करने की कोशिश करते है तो परेशानी आपके रास्ते में आती जरूर है लेकिन आपके बुलंद हौसलों के आगे हार जाती है उसे आपके रास्ते से हटाना ही पड़ता है. रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने साबित करके दिखाया है. बचपन में पैसे की अभाव में पढ़ाई तक नहीं कर पा रहे थे लेकिन पिता के मेहनत ने उन्हें पढ़ने से नहीं रोका उनके पिता ने लकड़ी चुनकर उन्हें पढ़ाया जिसका नतीजा भी उन्हें देखने को मिला.आपको बता दे कि मंजूनाथ साल 2011 बैच के आईएएस अधिकारी है जिनको साल 2013 में गवर्नर ऑफ एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है.
पढ़े डीसी मंजूनाथ भजन्त्री के संघर्ष की कहानी
मंजूनाथ भजंत्री नीति आयोग जैसे अहम पोस्ट पर अपनी सेवा दे चुके है हालंकी यहां तक का सफर संघर्ष और कठिनाइयों से भरा लेकिन उन्हें कभी भी हार नहीं मानी.आज जिस तरीके से बच्चे छोटी-छोटी परेशानियों को लेकर हार मान जाते है तो वहीं आज के जमाने में मंजूनाथ भजंत्री युवाओं के लिए प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत है जिनसे सभी को कुछ सीखना है.आपको बता दे की मंजूनाथ देवघर जमशेदपुर और कई जिलों में डीसी के तौर पर सेवा दे चुके है फिलहाल वह झारखंड की राजधानी रांची के डीसी का पद संभाल रहे है.ऐसे में चलिए आज हम उनके बारे में बात करते है और संघर्ष की कहानी की चर्चा करते है.
बचपन से ही आर्थिक हालात खराब थे
आपको बता दे की मंजूनाथ भजन कर्नाटक के रहने वाले है जहां बेलगांव जैसे छोटे गांव से वह आते है.बचपन में उनके परिवार का भरन पोषण करना भी उनके पिता के लिए मुश्किल था वही मंजूनाथ भजंत्री की पढाई में काफी तेज थे जिसको देखते हुए पिता ने पढाई से नहीं रोका, उनको जंगल से लकड़ी काटी और चुनकर परिवार का भरण पोषण किया तो वहीं इनको पढाई में भी योगदान दिया है.आपको बता दे कि मंजूनाथ भजंत्री पाँच भाई बहन है. पिता के संघर्ष ने मंजूनाथ को एक आईएएस अधिकारी बनकर ही दिया.
बिना कोचिंग के ही 10वीं 12वीं में टॉप किया
मंजूनाथ भजंत्री बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज थे, बीना कोचिंग के ही दसवीं के बोर्ड और 12वीं में टॉप किया था. आईआईटी बॉम्बे कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की.हालांकी स्टार्टअप्स में भी अपना हाथ आजमाया लेकिन इसमे वह कामयाब नहीं हो पाए लेकिन हार नहीं मानी.शायद किस्मत उन्हें आईएएस ऑफिसर बनाना चाहती थी.साल 2009 में सिविल सेवा की तैयारी में पहले ही कोशिश में वह आईपीएस चुने गए हालांकी उनका लक्ष्य आईपीएएस बनना था.अपने संकल्प को लेकर साल 2011 में फिर से परीक्षा दिया और एक सफल आईएएस अधिकारी बनने के सपना को साकार किया.
पढ़े रांची डीसी को कौन सी फिल्म है पसंद
हालंकी मंजूनाथ भजंत्री अपने व्यस्त शेड्यूल से समय निकालकर अपने बेहद पसंदीदा में से एक गिटार बजाने का शौक पूरा करते है उन्हें फिल्मों का भी काफी ज्यादा शौक है.अगर उनके पसंदीदा फिल्मों की बात की जाए तो 3 इडियट्स उन्हें काफी ज्यादा पसंद आये थी. जिसको इन्होन कई बार देखा जब भी उन्हें तनाव महसुस होता है तो वह गाने सुनते है.आज मंजूनाथ भजंत्री एक ऐसे आईएएस अधिकारी के रूप में जाने जाते है जो अपने काम से कोई भी समझौता नहीं करता. वह किसी भी पावर से डरकर कोई भी फैसला नहीं लेते है. वह एक सख्त अधिकारी है जिनके हौसलों को सभी लोग सलाम करते है.
Thenewspost - Jharkhand
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