Jharkhand::44 सीटों पर लड़कर 34 सीट लाने वाली पार्टी को कैसे पिता ने संवारा और पुत्र ने दी ऊंचाई,पढ़िए इस रिपोर्ट में

    Jharkhand::44 सीटों पर लड़कर 34 सीट लाने वाली पार्टी को कैसे पिता ने संवारा और पुत्र ने दी ऊंचाई,पढ़िए इस रिपोर्ट में

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद में जन्मा झारखंड मुक्ति मोर्चा आज की तारीख में झारखंड में सबसे बड़ा दल बनकर उभरा है. 2024 के विधानसभा चुनाव में 44 सीटों पर लड़कर 34 सीट पार्टी ने हासिल की है. वैसे इंडिया गठबंधन को कुल 56 सीट मिली है.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन 1973 में धनबाद में हुआ था. शिबू सोरेन, विनोद बिहारी महतो और एके राय ने मिलकर इस पार्टी को बनाया था. इस चुनाव में एके राय की पार्टी के दो लोग विधायक बन गए हैं. धनबाद और सिंदरी से एके राय की पार्टी (अब माले में विलय) की जीत हुई है. यह अलग बात है कि एके राय अब इस दुनिया में नहीं है. लेकिन उनके दो बड़े विश्वासपात्र के पुत्र इस चुनाव में सिंदरी और निरसा से भाजपा को शिकस्त दी है. निरसा से जीते अरूप चटर्जी स्वर्गीय गुरुदास चटर्जी के बेटे हैं. तो बबलू महतो चार बार के विधायक रहे आनंद महतो के पुत्र हैं. शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन तो झारखंड में सरकार की अगुवाई ही कर रहे हैं. लेकिन इस चुनाव में विनोद बिहारी महतो का कोई परिवार हिस्सा नहीं लिया था. झारखंड का यह चुनाव विनोद बिहारी महतो के किसी परिवार के बिना ही हुआ. यह अलग बात है कि निरसा के विधायक रहे गुरुदास चटर्जी की हत्या के बाद उनके बेटे अरूप चटर्जी राजनीति में आए और विधायक बने. आगे के चुनाव में वह हारे भी. 2019 के चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था. जबकि 2024 में फिर वह निरसा से विधायक बन गए हैं.

    पुराने लोग बताते हैं कि बाद में झामुमो के गठन के बाद एके राय की राह अलग हो गई. बिनोद बिहारी महतो जब तक जीवित रहे, झामुमो के साथ रहे. उसके बाद शिबू सोरेन ने पार्टी को संवारा और उनके बेटे हेमंत सोरेन ने पार्टी को बुलंदी दी. अपने पिता के पुराने साथियों के साथ-साथ नए चेहरों को भी पार्टी से जोड़ा. झामुमो की दूसरी और तीसरी पीढ़ी तक के कार्यकर्ता सदन में पहुंच गए हैं. आज उम्र दराज विधायकों की गिनती होगी तो उसमें स्टीफन मरांडी और हेमलाल मुर्मू का नाम सामने आएगा.

    कल्पना सोरेन को लेकर एक नया जनमानस झारखंड में तैयार

    यह अलग बात है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा कई झंझावातों को झेलकर यहां तक पहुंचा है. 2024 की ही बात कर ली जाए तो हेमंत सोरेन को जब जेल जाना पड़ा, तो लगा कि पार्टी पर संकट बढ़ेगा. लेकिन उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने पार्टी को नई दिशा दी. लोकसभा में पांच आरक्षित सीटों पर इंडिया गठबंधन की जीत में उनकी बड़ी भूमिका रही. विधानसभा चुनाव में भी कल्पना सोरेन क्राउड पुलर बनी रही. कहा जा सकता है कि कल्पना सोरेन को लेकर एक नया जनमानस झारखंड में तैयार हो गया है. विधानसभा चुनाव में सहयोगी दल कांग्रेस,राजद,माले के लिए भी कल्पना सोरेन की सभाएं करना मजबूरी बन गई.

    आज फिर चौथी बार हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे

    कल्पना सोरेन खुद गिरिडीह के गांडेय विधानसभा चुनाव से विधायक चुनी गई है. उन्होंने झारखंड सरकार की कई योजनाओं को चुनाव प्रचार का धार बनाया और सरकार के खिलाफ किसी भी प्रकार के एंटी इन कंबेंसी को सामने नहीं आने दिया. आज फिर चौथी बार हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे. 2024 के इंडिया ब्लॉक में झामुमो के अलावा कांग्रेस,राजद और माले शामिल है. देखना दिलचस्प होगा कि किस दल के कोटे से कितने मंत्री बनते हैं.


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