पृथ्वी दिवस पर झरिया की पुकार: “अब भी समय है, मेरा पुराना रूप लौटा दो… वरना थम जाएंगी सांसें!”

    पृथ्वी दिवस पर झरिया की पुकार: “अब भी समय है, मेरा पुराना रूप लौटा दो… वरना थम जाएंगी सांसें!”

    झरिया (JHARIA): जमीनी आग से धधकती झरिया को बचाने के लिए सामाजिक संगठनों का जद्दोजहद जारी है. हर किसी विशेष मौके पर संगठन कार्यक्रम आयोजित करते हैं और झरिया के दुर्दिन की ओर सबका ध्यान खींचने की कोशिश करते हैं. अनोखे ढंग से कार्यक्रम किये जाते हैं. मांग की जाती है कि मेरा वह पुराना दिन लौटा दो. झरिया बोल रही है कि अब तो मेरी आंचल खाली हो गई है, फिर भी मेरी आड़ में राजनीति क्यों की जा रही है? मेरी खाली पड़ी आंचल में बालू क्यों नहीं भर दिया जा रहा है? मेरे नाम पर बालू डकारने वाले तो बहुत से स्वर्ग सिधार गए हैं, फिर भी उनकी करतूत बताने के लिए खड़ी हूँ. 

    झरिया में अनोखे तरीके से हुए कार्यक्रम

    बुधवार को पृथ्वी दिवस के अवसर पर झरिया के सामाजिक संगठनों ने एक अनोखे तरीके से एक विश्वव्यापी 'हरित चेतना संदेश' देने की पहल की. पृथ्वी दिवस पर भारतीय राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के पहली छंद से लिया गया 'सुजलाम सुफलाम शस्य शमालम' शब्दावली को वैश्विक हरित चेतना संदेश बताया गया. भाग लेने वाले बच्चों ने 'वन्दे मातरम्' गीत में वर्णित ऐसी हरित देश की मांग की. यह कार्यक्रम झरिया के सामाजिक संस्था इंस्टीट्यूशन फॉर नेशनल एमिटी (INA) और कोलफील्ड चिल्ड्रन क्लासेज  द्वारा संयुक्त रूप से सदी पुराने अग्नि प्रभावित झरिया कोलफील्ड्स के घनुडीह इलाके में आयोजित किया गया. इसका उद्देश्य वंदे मातरम् के 150 वर्षों के स्मरणत्सव को पृथ्वी दिवस के अवसर के साथ जोड़ना था.  

    पृथ्वी के मॉडल को साथ लेकर निकाली गई आकर्षक रैली

    पृथ्वी दिवस के अवसर पर बच्चों ने अपने सिर पर मट्टी से बना पृथ्वी का मॉडल रखा और आकर्षक रैली निकली. बच्चों ने कई पोस्टर लेकर कोलियरी इलाका घूमे और जोर जोर से नारे लगाए, कहा कि ' वंदे मातरम हम खूब गायेंगे, धरती को भी हरा बनाएंगे','क्या कहती है धरती माता, मेरा रूप वापस करो.'

    ‘यदि वंदे मातरम की मान बढ़ाना हैं, तो धरती पर पेड़ लगाने है.‘  कार्यक्रम 'वसुंधरा वंदना' के साथ शुरू हुआ, जहाँ केन्दुआ के छात्राओं नंदिनी कुमारी, दुर्गा कुमारी, मुस्कान कुमारी, दुर्गी कुमारी ने वंदे मातरम् गाने  पर नृत्य प्रस्तुत किये. 

    प्रदूषण मुक्त पानी, हवा और पृथ्वी बनाना सबकी जिम्मेवारी 
      
    मुख्य आकर्षण पृथ्वी का एक मॉडल था, जो देवी दुर्गा और धरती (मातृभूमि) के समानता को दिखाता है. जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 'वन्दे मातरम् गीत' में वर्णित किया गया था. पृथ्वी मॉडल का विचार पिनाकी रॉय द्वारा बनाए गए एक थीम कार्ड से आया. कलाकार संजय पंडित ने इसे अंतिम रूप दिया. इंस्टीट्यूशन फॉर नेशनल एमीटी (INA) के संस्थापक पिनाकी राय  ने कहा कि 'हरित पृथ्वी और प्रदूषण रहित प्राकृतिक जल का वर्णन, 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखी गई वंदे मातरम राष्ट्रभक्ति गीत में किया गया था. हमारे देश में वंदे मातरम् के 150 वर्ष के उत्सव के अवसर पर अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसी प्रदूषण मुक्त पानी, हवा और पृथ्वी को बनाए रखें.

    वंचित समुदाय के बच्चो ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा

    सीसीसी के मौसमी राय और संजय पंडित के नेतृत्व में झरिया कोयला खदानों काम करने वाले परिवारों के वंचित समुदाय के 30 से अधिक बच्चे 'वंदे बसुंधरा, वंदे मातरम्' कार्यक्रम में शामिल हुए. ये अनूठा पहल झरिया के घनुडीह इलाके में परित्यक्त बीसीसीएल कार्यालय के के सामने सुरक्षित दूरी पर आयोजित हुआ, जिसे एक दशक पहले भूमिगत कोयला आग के कारण खाली किया गया था. कार्यक्रम में, कुछ फलदार पेड़ वितरित किए गए. सभी ने पेड़ लगाने का संकल्प लिया.18 साल की लड़की नंदिनी कुमारी ने कहा, "दुनिया को हरा-भरा बनाने के लिए, हम और पेड़ लगाएंगे जैसा कि हमने अपने नारे में कहा था." पिनाकी रॉय, संजय पंडित और मोसुमी रॉय के अलावा, पत्रकार चंदन पाल, पवन कुमार और छात्रा सुहानी कुमारी, दीपशिखा कुमारी, रागिनी कुमारी आरती कुमारी, गुंजन कुमारी, सुनयना कुमारी, सिमरन कुमारी, जीवन कुमार, अंशु कुमार, विवेक कुमार, घनश्याम कुमार, किन्जल कुमारी, चांदनी कुमारी, तान्या कुमारी, अंजलि कुमारी आदि उपस्थित थे. 

    झरिया यूथ  कांसेप्ट ने भी झरिया बचाने की ली शपथ

    दूसरी ओर विश्व पृथ्वी दिवस पर यूथ कॉन्सेप्ट ने  पृथ्वी संरक्षण शपथ कार्यक्रम किया. नारे लगे कि पेड़ लगाऊँगा, कचरा नहीं फैलाऊँगा और झरिया को हरा बनाऊँगा. मध्य विद्यालय पाथरडीह कोलवाशरी, झरिया पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पौधारोपण भी किया गया. पीपल, गुलमोहर, सागवान के पौधे लगाए गए. मौके पर उपस्थित यूथ कॉन्सेप्ट संयोजक अखलाक अहमद ने कहा अभी तो गर्मी शुरुआत हुई है. 40 से 45 डिग्री तक पहुंच चूका है तापमान. आने वाला समय और ही भयानक हो सकता है. अगर पर्यावरण संरक्षण पर जोर नहीं दिया गया और कहा गया कि कुछ पाने के लिये हमने कीमत कितनी चुकाई, अपनी सांसो को खुद हमने जहरीली हवा दिलाई! मिलकर प्रयास करें अर्थ दिवस पर पर्यावरण संरक्षण करें.

     



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