धनबाद(DHANBAD): पश्चिम बंगाल का चुनाव ऐतिहासिक होने की ओर बढ़ रहा है. केवल दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं. पहले चरण का चुनाव गुरुवार यानी 23 अप्रैल को होगा. इसमें 152 सीटों पर वोटर अपना वोट डालेंगें. दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी. पहले चरण में 16 जिलों के 152 सीटों पर मतदान होगा. बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल में 2001 के बाद पहली बार दो चरणों में चुनाव होने जा रहा है. 2021 में चुनाव आठ चरणों में हुआ था. इस बार के चुनाव में चप्पे -चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. ड्रोन और सीसीटीवी कैमरा से भी चुनाव प्रक्रिया के निगरानी हो रही है.
केवल सत्ता पाने की जंग नहीं है 2026 चुनाव
2026 का यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक होगा. सभी दल अपनी अपनी जीत के दावे कर रहे है. बंगाल चुनाव इस बार इसलिए भी विशेष है कि दीवारों पर भी प्रचार जंग छिड़ी हुई है. कहीं दिखे तंज किए गए हैं तो कहीं मिम्स बनाए गए है. गालियों तक में यह सब हुआ है. लोग बता रहे हैं कि बंगाल चुनाव 2026 केवल सत्ता पाने की जंग नहीं है, बल्कि यह चुनाव अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक भविष्य का भी फैसला करेगा. राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि 2026 का चुनाव परिणाम यह तय कर देगा कि अभिषेक बनर्जी विरासत संभालने के लिए तैयार हैं अथवा नहीं. हालांकि अभिषेक बनर्जी ने चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.
2026 का परिणाम तृणमूल की राजनीति को भी करेगा प्रभावित
2026 का परिणाम अभिषेक बनर्जी के लिए केवल हार जीत का नहीं बल्कि उनके नेतृत्व की परीक्षा भी है. इस बार के चुनाव में ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल पर ध्यान केंद्रित किया है, तो दक्षिण बंगाल की जिम्मेवारी अभिषेक बनर्जी पर है. दक्षिण बंगाल भाजपा और बाम दल को रोकना अभिषेक बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती होगी. हालांकि अभिषेक बनर्जी इस बार रणनीति में भी बदलाव किया है. अभिषेक बनर्जी के लिए सबसे बड़े राजनीतिक चुनौती सुवेंदु अधिकारी हैं. नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी को घेरने के लिए अभिषेक बनर्जी ने मोर्चा संभाल रखा है. 2021 में ममता बनर्जी की हार का बदला लेने के लिए उन्होंने नंदीग्राम में पवित्र कर को मैदान में उतारा है. नंदीग्राम का चुनाव परिणाम भी बहुत कुछ बताएगा.


