कागजी घोड़े पर सवार जामताड़ा प्रशासन,  कचरे के ढेर में दफ़न हुआ स्वच्छ भारत अभियान, मंत्री के सिपहसालार ने आंदोलन का दिया अल्टीमेटम

    कागजी घोड़े पर सवार जामताड़ा प्रशासन,  कचरे के ढेर में दफ़न हुआ स्वच्छ भारत अभियान, मंत्री के सिपहसालार ने आंदोलन का दिया अल्टीमेटम

    जामताड़ा(JAMTARA): जामताड़ा जिले में विभिन्न विभागों में प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर होने से सत्ताधारी दल और आम जनता दोनों चिंतित हैं. जिला प्रशासन की विफलता से असंतोष अब व्यापक हो चुका है और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में मीडिया के सवाल से कतरा रहे हैं.

    जिला प्रशासन उड़ा रहा स्वच्छता का मजाक  

    3 मार्च 2025 को जामताड़ा में उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति की बैठक हुई. बैठक में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के साथ-साथ जिला पर्यावरण योजना और प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर व्यापक चर्चा हुई.  हालांकि, ये प्रस्ताव कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह गए और ठोस कार्रवाई में तब्दील नहीं हो पाए.

    चर्चा किए गए मुख्य मुद्दे

    बैठक में चर्चा किए गए सात बिंदुओं में से एक प्राथमिक संकल्प कचरा निपटान और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन था. पहली प्राथमिकता होने के बावजूद, उपायुक्त की एजेंसियां ​​इस मोर्चे पर कोई प्रगति करने में विफल रही है. निष्क्रियता ने स्थानीय नेताओं और नागरिकों की कड़ी आलोचना की है.

    राजनीतिक आक्रोश

    जिला कांग्रेस प्रवक्ता इरशादुल हक उर्फ ​​आरसी ने मौजूदा अव्यवस्था पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, "हमारे विधायक इरफान अंसारी ने विधानसभा में बार-बार इस मुद्दे को उठाया है. राज्य के एक मंत्री की मौजूदगी के बावजूद जिला प्रशासन चुप है. लापरवाही ने निवासियों और राहगीरों के लिए जीना मुश्किल कर दिया है. अगर प्रशासन जल्द नहीं जागा तो यह घातक साबित होगा. अगर हालात नहीं सुधरे तो हम विरोध करने के लिए मजबूर होंगे." 

    पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं

    आलोचना में आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एसडी सरकार ने धंधरा मौजा सिमलबेरिया पुरातन पतित, खाता नंबर 2 की खतरनाक स्थिति की ओर ध्यान दिलाया. जहां लगभग छह एकड़ भूमि को शहर के कचरे के लिए अवैध डंपिंग ग्राउंड में बदल दिया गया है. इस जगह से दुर्गंध आती है, जो सड़ते हुए जानवरों के शवों के कारण और भी बढ़ जाती है. जिससे गंभीर पर्यावरण प्रदूषण होता है.  

    विडंबना यह है कि इस इलाके में डिप्टी कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और अन्य प्रमुख अधिकारियों के आवास हैं.  साथ ही संथाल परगना जाने वाले उच्च पदस्थ राजनेताओं और नौकरशाहों का भी यहां आना-जाना लगा रहता है. फिर भी प्रशासन बिगड़ती स्थिति से बेपरवाह बना हुआ है.   

    चिंतित आवाज़ें

    जिला कांग्रेस प्रवक्ता इरशादुल हक उर्फ ​​आरसी ने कहा कि, "सफाई और कचरा कुप्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की हमारी मांगों को बहुत लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा है. अगर प्रशासन उदासीन रहा तो हम सड़कों पर उतरेंगे." वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता एसडी सरकार ने कहा कि, "अवैध डंपिंग और पर्यावरण संबंधी खतरों को दूर करने में जिला प्रशासन की विफलता सार्वजनिक स्वास्थ्य मानदंडों का सरासर उल्लंघन है. स्थिति बिगड़ने से पहले अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए."  

    ज़मीनी हकीकत

    शीर्ष अधिकारियों की हाई-प्रोफाइल मौजूदगी और नियमित दौरों के बावजूद जिले की सफाई की अनदेखी की जाती है. स्वच्छ भारत अभियान के दौरान किए गए वादों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है, जिससे स्थानीय प्रशासन की जन कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठ रहे हैं.  

    जामताड़ा के नागरिक प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे हैं जबकि जवाबदेही की मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. क्या जिला प्रशासन आखिरकार जिम्मेदारी लेगा या फिर स्वच्छ और स्वस्थ जामताड़ा के वादे दूर की कौड़ी कल्पना बनकर रह जाएंगे?

    रिपोर्ट-आर पी सिंह

     


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