Jharkhand: बेलगाम साइबर अपराधियों पर नकेल के लिए हुए नए इंतजाम, पढ़िए किस अधिकारी को कहा भेजा गया !

    Jharkhand: बेलगाम साइबर अपराधियों पर नकेल के लिए हुए नए इंतजाम, पढ़िए किस अधिकारी को कहा भेजा गया !

    धनबाद(DHANBAD) : साइबर अपराध को लेकर सरकार एक बार फिर  सजग और सक्रिय हुई है. विशेष तौर पर अधिकारियों को जिम्मेवारी देकर ज़िलों में भेजा जा रहा है.  जानकारी निकल कर आई  है कि राज्य के 10 प्रोवेशनर  डीएसपी को अलग-अलग जिलों में पदस्थापित किया गया है.  इन जिलों में देवघर, जमशेदपुर, रांची, धनबाद, जामताड़ा और  गिरिडीह जिले शामिल है.  22 मार्च को इस संबंध में आदेश निकाला गया है. आदेश के मुताबिक चाईबासा में पदस्थापित डीएसपी कुमार विनोद को और गोड्डा में पदस्थापित डीएसपी कुमार गौरव की देवघर जिला में प्रतिनियुक्ति की गई है. वहीं सरायकेला में पदस्थापित  डीएसपी सुश्री पूजा कुमारी, जमशेदपुर में पदस्थापित डीएसपी सन्नी वर्धन को जमशेदपुर जिला में पदस्थापित किया गया है. 

    वहीं पलामू के डीएसपी राजेश यादव, हजारीबाग की  डीएसपी सुश्री पूजा कुमारी को रांची जिला में भेजा गया है. गिरिडीह में पदस्थापित डीएसपी नीलम कुजूर और धनबाद में ही पदस्थापित अर्चना स्मृति खलको को धनबाद जिला में तत्काल प्रभाव से पदस्थापित किया गया है. जामताड़ा में पदस्थापित चंद्रशेखर को जामताड़ा जिले में साइबर अपराध रोकने की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं ,गिरिडीह में पदस्थापित डीएसपी कैलाश प्रसाद महतो को गिरिडीह जिला में पदस्थापित किया गया है. कहा गया है कि जिलों में पदस्थापित अधिकारी संबंधित जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कार्य करेंगे. यह भी कहा गया है कि उनके वेतन की निकासी उनके व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए आवंटित जिला से ही होगी.  

    बता दें कि झारखंड में साइबर अपराधी तरह-तरह के हथकंडे अपना कर लोगों को ठगते है. पुलिस डाल-डाल तो साइबर अपराधी पात-पात  चलते है. बैठे रहते हैं झारखंड के किसी जिले में और बाहर के प्रदेशों के लोगों को ठगते है. कभी पुलिस अधिकारी बन जाते हैं, तो कभी कस्टम अधिकारी बन जाते हैं, तो कभी आयकर के अधिकारी बनकर ठगते  है. कभी दूर संचार विभाग के अधिकारी बन ठगी करते है. कभी नियोक्ता बन जाते हैं, कभी किसी भी विभाग के अधिकारी बनकर लोगों को साइबर अरेस्ट कर लेते हैं और उनसे ठगी करते है. वैसे तो झारखंड के जामताड़ा से साइबर अपराध की शुरुआत हुई लेकिन अब जामताड़ा से झारखंड के दूसरे जिले आगे निकल गए है. प्रतिबिंब एप  सक्रिय होने के बावजूद अपराधियों की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लग पा रहा हहै. संभवतः इसको देखते हुए पुलिस प्रशासन ने प्रोवेशनर्स डीएसपी को विशेष जिम्मेवारी देकर जिलों में पदस्थापित किया है. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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