अजब सिस्टम की गजब कहानी! झारखंड में मरने के बाद भी करनी पड़ती है नौकरी, पढ़िये हैरान करानेवाला मामला

    अजब सिस्टम की गजब कहानी! झारखंड में मरने के बाद भी करनी पड़ती है नौकरी, पढ़िये हैरान करानेवाला मामला
    एक बार अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो दोबारा वह जिंदा नहीं हो सकता है लेकिन कई बार हमारे सामने ऐसे अजीबोगरीब खबरें सुनने और देखने को मिलती है जहां दावा किया जाता है कि मरने के बाद लोग फिर से जिंदा वापस आ गए. वहीं झारखंड के गढ़वा जिले के अजीबोगरीब कारनामा सामने आया है, जहां एक मृत कर्मचारी का तबादला कर दिया गया है.जिसकी चर्चा पुरे झारखंड में हो रही है आइए अब इसकी पूरी कहानी आपको बताते है.

     गढ़वा(GARHWA):एक बार अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो दोबारा वह जिंदा नहीं हो सकता है लेकिन कई बार हमारे सामने ऐसे अजीबोगरीब खबरें सुनने और देखने को मिलती है जहां दावा किया जाता है कि मरने के बाद लोग फिर से जिंदा वापस आ गए. वहीं झारखंड के गढ़वा जिले के अजीबोगरीब कारनामा सामने आया है, जहां एक मृत कर्मचारी का तबादला कर दिया गया है.जिसकी चर्चा पुरे झारखंड में हो रही है आइए अब इसकी पूरी कहानी आपको बताते है.

     पढ़िये हैरान करानेवाला मामला

     दरसल भवनाथपुर जिला प्रशासन की अनोखी पदस्थापना की पहल भवनाथपुर अंचल में चर्चा का विषय बन गई है.भवनाथपुर अंचल में पदस्थापना सूची जारी होने के बाद यह मामला सामने आया कि पूर्व में मृत हो चुके राजस्वकर्मी गौरव आनंद का भी ट्रांसफर कर दिया गया है. जानकारी के अनुसार जिला स्तर से जारी स्थानांतरण आदेश में कई राजस्वकर्मियों का तबादला किया गया है.इसी सूची में दिवंगत राजस्वकर्मी गौरव आनंद का नाम भी शामिल कर दिया गया. निर्गत पत्र में उन्हें भवनाथपुर अंचल से रंका अंचल में पदस्थापित दिखाया गया है, जबकि उनका निधन करीब चार माह पहले ही हो चुका है. आदेश सामने आने के बाद अंचल कार्यालय और स्थानीय लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बन गया है. लोगों का कहना है कि जब संबंधित कर्मी का देहांत हो चुका है, तो ऐसे में उनका तबादला आदेश जारी होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है.

    पढ़े अंचल कार्यालय के कर्मियों ने क्या कहा

     वहीं अंचल कार्यालय के कर्मियों का कहना है कि स्थानांतरण सूची जिला स्तर से जारी की जाती है, जिसमे संभवतः पुराने डाटा के आधार पर नाम शामिल हो गया होगा.इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे है. स्थानीय लोगों ने कहा कि ऐसे मामलों में विभाग को आदेश जारी करने से पहले अभिलेखों की सही तरीके से जांच करनी चाहिए, ताकि इस तरह की त्रुटि से बचा जा सके.

    रिपोर्ट-धर्मेंद्र कुमार


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