"खनन एप" पर कैसे भारी पड़ रहे धनबाद के कोयला चोर -तस्कर, आउट सोर्स कंपनियां कैसे बनी सहायक

    कोयला चोरों के सिंडिकेट की व्यवस्था इतनी मजबूत है कि उसे कहीं व्यवधान नहीं होता।  ना कोयला कंपनियां  व्यवधान पैदा करती हैं, ना सीआईएसएफ और न हीं पुलिस।

    "खनन एप" पर कैसे भारी पड़ रहे धनबाद के कोयला चोर -तस्कर, आउट सोर्स कंपनियां कैसे बनी सहायक

    धनबाद(DHANBAD): कोयला मंत्री जी-- आपके "खनन ऐप" पर भारी पड़ रहे हैं धनबाद के कोयला चोर और तस्कर।  कंपनी के समानांतर चल रहा उनका अवैध उद्योग निर्वाध  जारी है.  एक तरह से कहा जा सकता है कि धनबाद के कोयला चोर और तस्कर मैनेजमेंट के साथ-साथ कोयला मंत्रालय के तरकीब को भी चुनौती दे रहे हैं.  दरअसल, अवैध खनन तो हो ही रहा है, लेकिन आउटसोर्सिंग कंपनियों से हाईवा  के हाईवा  कोयला टपा  दिए जा रहे हैं.  इन हाईवा  को कहीं कोई रोकना नहीं है, टोकता  नहीं है, बल्कि हाईवा  को अपने गंतव्य स्थान पर जाने की राह आसान कर दिया जाता है. बीसीसीएल की कोलियरियों  से रोज कितना कोयला टपाया  जा रहा है, इसका आंकड़ा तो मैनेजमेंट के पास भी नहीं होगा। हो भी नहीं सकता है.  

    मैनजमेंट क्यों नहीं कर पा  रहा सख्त एक्शन 

    आउटसोर्सिंग कंपनियां कितना उत्पादित कोयला मैनेजमेंट को देती हैं, उतना ही भर से मैनेजमेंट मतलब रखता है.  सूत्र बता रहे हैं कि यह कोई एक इलाके में नहीं चल रहा है, कतरास के बगल का गोविंदपुर क्षेत्र काफी चर्चे में है. यहां तीन गैंग सक्रिय हैं. इनकी पीठ पर कई मजबूत हाथ हैं.  अन्य आउटसोर्सिंग कंपनियों में भी यही हाल है. मतलब, अंदाज नहीं लगाया जा सकता है कि कितना कोयला रोज उठाया जा रहा है.   बीसीसीएल के सीएमडी के लिए भी यह  एक बड़ी चुनौती है कि इसमें शामिल अधिकारियों से लेकर कर्मचारी तक को कैसे दंडित किया जाए? सीएमडी   कह चुके हैं कि कोयला चोरी धनबाद के लिए कोढ़  है.  इसको दूर किए बिना कंपनी की हालत नहीं सुधर सकती है.  दावे तो बहुत किये  गए लेकिन जमीन पर उतर नहीं रहा है. 

    कोयला चोरों के सिंडिकेट के आगे सब कुछ फेल 

     कोयला चोरों के सिंडिकेट की व्यवस्था इतनी मजबूत है कि उसे कहीं व्यवधान नहीं होता।  ना कोयला कंपनियां  व्यवधान पैदा करती हैं, ना सीआईएसएफ और न हीं पुलिस।  यह कोयला चोर और तस्कर गुटों  में बंट  गए हैं और सब अपना अपना अधिकार क्षेत्र चिह्नित कर लिए हैं.  ऐसे में तो कंपनी के कोयले की डिमांड घटना बहुत स्वाभाविक है और यही वजह है कि बीसीसीएल कैश बैक पॉलिसी को लेकर सामने आई है.  कोयला मंत्रालय  कोयला चोरी और तस्करी की घटनाओं से चिंतित है.  लगातार तरकीब ढूंढ रहा है, एक्शन की तैयारी कर रहा है, लेकिन सारी व्यवस्था कोयला चोर और तस्करों के आगे "बौनी" साबित हो रही है. 

    कोयला मंत्रालय के लिए भी सिंडिकेट बन गए हैं चुनौती 

    इधर ,बताया जा रहा कि कोयला मंत्रालय मन मजबूत कर लिया है कि अब कोयला चोरी और तस्करी पर रोक लगाना  बेहद जरूरी है.  वैसे तो कोयला मंत्रालय पहले भी जन भागीदारी की अपील कर चुका है , लेकिन अब खनन प्रहरी ऐप को और मजबूत और सशक्त कर दिया गया है.  कोयला मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स  पर पोस्ट किया है और कहा है कि -- हर नजर सख्त, हर कदम सतर्क, खनन प्रहरी कोयला मंत्रालय की यह सशक्त पहल अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के साथ-साथ जन भागीदारी को बढ़ावा दे रही है.  इसके माध्यम से नागरिक सीधे सूचना देकर कोयला संसाधनों की सुरक्षा, पारदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं. .  आज ही डाउनलोड करें और जिम्मेदार नागरिक बने. 

    कोयला मंत्रालय के प्रयास में कहां आ रही अड़चन 

    कोयला मंत्रालय भी  अब मानकर चल रहा है कि जब आम लोग निगरानी का हिस्सा बनेंगे, तब अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर और अधिक प्रभावी ढंग से एक्शन लिया जा सकता है.  जानकार बताते हैं कि खनन प्रहरी अब कोयला चोरी और तस्करी पर बड़ा चोट करने का एक माध्यम बन सकता है.   बता दें कि खनन प्रहरी एप  पर दर्ज  शिकायतों के आधार पर एक्शन होता है.  कोयलांचल  की बात की जाए तो कोयला चोरी और तस्करी यहां लाइलाज बीमारी बन गई है.  कभी-कभी तो कानून व्यवस्था के लिए भी संकट पैदा कर देती है.  बीसीसीएल की परित्यक्त खदानों से बेधड़क कोयले की चोरी और तस्करी होती है.  यह अलग बात है कि कोयला मंत्रालय अब नई-नई तरकीब से कोयला चोरी पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहा है.  कुछ दिनों पहले समाचार आया कि सीआईएसएफ  को और प्रभावी बनाया जा रहा है.  सीआईएसएफ  अब जिला पुलिस के भरोसे नहीं रहेगा। 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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