रांची (RANCHI): बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने अपने पिता योगेंद्र साव के पार्टी से निष्कासन पर गहरा आक्रोश जताया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बिना किसी नोटिस और उचित प्रक्रिया के की गई. अंबा प्रसाद ने कहा कि पार्टी की ओर से यह कहना गलत है कि उनके पिता ने अपनी बात संगठन के भीतर नहीं रखी. उनके मुताबिक, मुद्दों को पहले ही नेतृत्व के सामने रखा गया था, लेकिन किसी ने उनका साथ नहीं दिया.
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस यह भी कहा कि उनके पिता को लगातार धमकियां मिल रही थीं, लेकिन पार्टी ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. अंबा ने दावा किया कि पूरे मामले में न्यायिक और संगठनात्मक प्रक्रिया की अनदेखी की गई और दबाव में आकर निष्कासन का फैसला लिया गया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे आत्मसम्मान से समझौता कर राजनीति नहीं करेंगी और इस मामले को लेकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक जाएंगी.
प्रेस वार्ता के दौरान अंबा प्रसाद ने सिर्फ पार्टी ही नहीं, बल्कि प्रशासन और कॉर्पोरेट कंपनियों पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि उनके परिवार को पिछले कई वर्षों से निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वे विस्थापन के मुद्दे को लगातार उठा रही हैं.
अंबा ने एनटीपीसी, अडाणी समूह और सीसीएल पर आरोप लगाते हुए उन्हें “कॉर्पोरेट माफिया” बताया. उनका कहना था कि इन कंपनियों को प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है और विस्थापितों के साथ अन्याय हो रहा है.
उन्होंने दावा किया कि उनके संघर्ष के कारण ही मुआवजा राशि में बढ़ोतरी हुई, लेकिन अब भी लोगों को न्याय नहीं मिल रहा. अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद उनका घर तोड़ दिया गया और इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात था. इस कार्रवाई में उनकी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा.
अंबा ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने कभी उनकी स्थिति जानने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि आज वे इस लड़ाई में अकेली पड़ गई हैं, लेकिन न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने पूरे घटनाक्रम को संविधान और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया.
Thenewspost - Jharkhand
4+


