जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पश्चिम के विधायक सरयू राय के धरना के बाद भी ट्रेनों का परिचालन सही से नहीं हो पा रहा है. जमशेदपुर में ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी अब हजारों मजदूरों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है. हर दिन विभिन्न इलाकों से करीब 50 हजार मजदूर काम की तलाश में टाटानगर पहुंचते हैं. लेकिन ट्रेन समय पर नहीं पहुंचने के कारण वे अपने कार्यस्थल पर देरी से पहुंच रहे हैं. इसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ रहा है, क्योंकि कंपनियां देर से आने पर मजदूरी में कटौती कर रही हैं. मजदूरों का कहना है कि यह समस्या अब रोज की हो गई है. कई बार घंटों देरी से ट्रेन पहुंचती है, जिससे नौकरी तक पर खतरा मंडराने लगा है. कुछ मजदूरों ने तो मजबूरी में काम छोड़ने तक का फैसला कर लिया है. उनका आरोप है कि रेलवे द्वारा मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे यात्री ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो रहा है. इस स्थिति ने मजदूरों की आर्थिक हालत को और कमजोर कर दिया है. रोज की देरी अब उनके लिए सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि रोजी-रोटी का संकट बन चुकी है. यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है.

सुबह 8.30 बजे होता है पंच टाइम
शहर के विभिन्न कंपनियों में काम करने वाले मजदूर का अपने कार्यस्थल में पंच टाइम सुबह 8.30 बजे होता है. लेकिन ट्रेनों के देर से पहुंचने के कारण मजदूर समय पर कार्यस्थल नहीं पहुंच पा रहे है. कभी सुबह 9 बजे तो कभी सुबह 9:30 बजे ट्रेनों के लेट के कारण अपने कार्य स्थल पहुंच रहे है. मजदूरों का कहना है कि प्रति घंटे के हिसाब से पैसे काटे जा रहे हैं. कई मजदूरों ने तो ट्रेनों के रोज देर से टाटानगर आने के कारण नौकरी भी छोड़ दी है और अब वे बेरोजगार बैठे है. धालभूमगढ़ से रोजाना जमशेदपुर रोजगार के लिए आने वाले मजदूर सिद्धार्थ मुर्मू ने बताया कि ट्रेन देरी से चलने के कारण सप्ताह में काम से कम कर दिन ऑफिस पहुंचने में देर हो जाती है. कंपनी के अधिकारी कोई एक्सक्यूज नहीं सुनते हैं और सीधे पैसे काट लेते हैं.
राखामाइंस स्टेशन से ट्रेनें हो रही डिस्टर्ब
चांडिल की ओर से आने वाली ट्रेनों की दुर्गति तो रेलवे कर ही रहा है इसके अलावा खड़गपुर से भी आने वाली यात्री ट्रेनों की दुर्गति हो रही है. चक्रधरपुर रेल डिवीजन के रखामाइन्स रेलवे स्टेशन सबसे अधिक डिस्टर्ब है. इस रेलवे स्टेशन पर लगभग सभी ट्रेनों को खड़ा कर दिया जाता है. यात्री ट्रेनों को खड़ा कर रेलवे मालगाड़ियां पास करवाता है. कई बार इसको लेकर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों ने हंगामा भी किया है इसके बाद भी रेलवे अपनी हरकतों में सुधार नहीं ला रहा है. मजदूर घंटे रेलवे स्टेशन पर खड़े होकर ट्रेन खुलने का इंतजार करते दिखते हैं. वही बिना किसी सूचना के लोकल ट्रेनों को कैंसिल करने के कारण भी मजदूरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है.
सुबह तीन लोकल ट्रेनें फिर भी हो रही देरी
पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम, गिधनी, झारखंड के चाकुलिया, कोलपाड़ा, धालभूमगढ़, घाटशिला, गालूडीह, राखामाइंस, आसनबानी से रोजाना हजारों मजदूर टाटानगर आते है. सुबह 3 लोकल ट्रेनें है, लेकिन इसके बाद भी मजदूर समय पर नहीं पहुंच पा रहे है. झाड़ग्राम-पुरुलिया पैसेंजर, झाड़ग्राम धनबाद मेमू और खड़गपुर - टाटानगर मेमू पैसेंजर ट्रेनों से रोज सुबह मजदूर टाटानगर आते है. इन तीनों ट्रेनों को समय पर टाटानगर नहीं पहुंचाया जा रहा है. सोमवार को झाड़ग्राम धनबाद मेमू को अचानक कैंसिल कर दिया गया. जबकि खड़गपुर - टाटानगर मेमू पैसेंजर पहले गालूडीह और फिर टाटानगर रेलवे स्टेशन के आउटर पर मालगाड़ी को पास देने के लिए काफी देर तक खड़ी रही.
7 अप्रैल को दिया था धरना
ट्रेनों की लेटलतीफी के खिलाफ 7 अप्रैल को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरजू राय ने टाटानगर रेलवे स्टेशन पर एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया था. लेकिन इसके बाद भी ट्रेनों के संचालन में देरी हो रही है. इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए रेल संघर्ष समिति का भी गठन किया गया है.
Thenewspost - Jharkhand
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