सरायकेला में कंपनी गेट पर विस्थापित परिवारों का धरना, रोजगार की कर रहे मांग

    सरायकेला में कंपनी गेट पर विस्थापित परिवारों का धरना, रोजगार की कर रहे मांग

    सरायकेला (SARAIKELA): सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा में स्थित Amalgam Steel & Power Limited कंपनी के मुख्य गेट पर गुरुवार को जमीन प्रभावित परिवारों ने प्रदर्शन किया. सभी गेट के पास ही बैठ गए और नारेबाजी करने लगे. लोग अपने साथ खाना भी लेकर आए थे. मौके पर ही बैठ सभी ने खाना खाया.बड़ी संख्या में पुरुषों और महिलाओं ने कंपनी गेट के सामने बैठकर रोजगार की मांग उठाई. प्रदर्शन में बच्चे भी शामिल रहे. सूचना पर कांड्रा पुलिस मौके पर पहुंची है. पुलिस लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है. लेकिन लोग वहां से हटने को तैयार नहीं है. यह धारना प्रदर्शन कालिंदी समाज द्वारा किया जा रहा है. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कंपनी प्रबंधन के साथ-साथ प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए. खबर लिखे जाने तक अपनी मांगों को लेकर लोग धरने पर बैठे थे. कंपनी का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था. 

    नौकरी नहीं देने का लगाया आरोप
    धरना प्रदर्शन कर रहे रामचंद्र कालिंदी ने बताया कि
    वर्ष 2003 में उद्योग स्थापना के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की गई थी. उस समय परिवारों को भरोसा दिलाया गया था कि जिनकी जमीन जाएगी, उनके घर के सदस्यों को नौकरी दी जाएगी. लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कई परिवारों को रोजगार नहीं मिला. इससे प्रभावित लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. आरोप लगाया कि उद्योग शुरू होने के बाद कंपनी का विस्तार और उत्पादन लगातार बढ़ा, लेकिन जिन परिवारों ने अपनी जमीन दी, उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिला. उनका कहना है कि जमीन गंवाने के बाद आज भी कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. रोजगार नहीं मिलने के कारण युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है. 

    सैलरी कम दी जा रही
    महिला पूजा कालिंदी ने बताया कि जिन्हें कंपनी में नौकरी मिली है उन्हें सैलरी भी कम दी जा रही है. ऐसे में घर चलने में परेशानी हो रही है. परिवारों ने विकास की उम्मीद में अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ी थी, लेकिन बदले में केवल आश्वासन मिला. कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. आरोप लगाया कि मामले को वर्षों से टालते हुए सिर्फ बैठक और आश्वासन का दौर चलाया जाता रहा. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अब वे केवल वादों पर भरोसा नहीं करेंगे. उनकी मांग है कि जमीन देने वाले प्रत्येक पात्र परिवार को रोजगार दिया जाए, अन्यथा अधिग्रहित जमीन वापस की जाए. ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.



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