Dhanbad Politics:नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह की चुप्पी में क्या छिपा है बड़ा राज, क्यों हो रहा धमाके का इंतजार

    Dhanbad Politics:नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह की चुप्पी में क्या छिपा है बड़ा राज, क्यों हो रहा धमाके का इंतजार

    धनबाद(DHANBAD): क्या धनबाद की राजनीति बदलने वाली है ?क्या अब तक के समीकरण में उलट- फेर होने जा रहा है? क्या नवनिर्वाचित मेयर  संजीव सिंह की चुप्पी  में कोई बड़ा राज छिपा है? क्या इस बात  की भनक पर भाजपा सक्रिय हो गई है? क्या बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान संजीव सिंह के संपर्क में है? क्या वह संजीव सिंह को जदयू  में आने की  न्योता दे रहे हैं? यह सब ऐसे सवाल हैं, जो कोयलांचल की राजनीति को मथ  रहे हैं. संजीव सिंह की ओर से भी चुप्पी है, तो भाजपा भी फूंक -फूंक  कर कदम उठा रही है.  यहां यह कहना अप्रासंगिक नहीं होगा कि संजीव सिंह के चाचा(स्वर्गीय ) बच्चा बाबू भी नीतीश कुमार की अगुवाई वाली समता पार्टी में गए थे.  समता पार्टी के टिकट पर ही उन्होंने झरिया विधानसभा से चुनाव लड़ा था और विधायक बने थे.  फिर झारखंड की पहली  सरकार में नगर विकास मंत्री बने थे. 

    बच्चा बाबू भी नीतीश  कुमार की समता पार्टी से विधायक बने थे 

     यही समता पार्टी अब जदयू हो गई है.  यहां यह भी उल्लेख करना गलत नहीं होगा कि संजीव सिंह की जीत के बाद जदयू कोटे से बिहार के मंत्री मोहम्मद जमा खान बधाई देने के बहाने सिंह मेंशन पहुंचे थे.  और उन्होंने संजीव सिंह को बधाई दी थी.  दरअसल,  संजीव सिंह की कोयलांचल  की राजनीति में बढ़ते दखल को देखते हुए जदयू भी चाहता होगा कि उन्हें पार्टी में शामिल करा  लिया जाए.  कहने  के लिए जदयू भी एनडीए में है और भाजपा भी एनडीए में है.  झारखंड से चर्चित विधायक सरयू राय जदयू के टिकट पर जमशेदपुर पश्चिम से फिलहाल विधायक हैं.  ऐसे में नए समीकरण की आहट दिख रही है.  हालांकि भाजपा भी इस पूरे प्रकरण में नजर रख रही है.   भाजपा  संजीव सिंह के मामले में नरम रुख  तो जरूर दिखा रही है, लेकिन अभी इसके कोई मजबूत संकेत नहीं दिख रहे हैं. 

    राजनीति संभावनाओं का खेल और यही हो रहा धनबाद में 

     हां, इतना जरूर है कि संजीव सिंह के जीत के बाद धनबाद से भाजपा विधायक राज सिन्हा  सिंह मेंशन गए थे , और संजीव सिंह को बधाई दी.  इसके भी कई मतलब निकाले  जा रहे हैं. चर्चा तेज है कि धनबाद भाजपा में क्या कुछ बड़ा होने वाला है अथवा भाजपा को नवनिर्वाचित मेयर  संजीव सिंह से तालमेल बैठाने में कुछ वक्त लगेगा?  इसका जवाब अधिकृत तौर पर, न पार्टी की ओर से और न हीं संजीव सिंह की ओर से आ रहा है.  हो सकता है कि संजीव सिंह पार्टी की ओर से पहल का इंतजार कर रहे हो और पार्टी संजीव सिंह की ओर से पहल के इंतजार में बैठी हो.  दरअसल, यह सवाल इसलिए भी बड़ा हो गया है कि रांची में रविवार को भाजपा की ओर से निकाय चुनाव में जीते पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को सम्मानित किया गया.  राज्य भर से भाजपा समर्थित विजई  कार्यक्रम में पहुंचे थे.  इस कार्यक्रम से हजारीबाग और धनबाद से निर्वाचित मेयर नहीं पहुंचे थे. 
    इसके बाद राजनीतिक संभावनाओं का सिलसिला शुरू हो गया है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

     

     



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